रायपुर: धमतरी के सिवनीकला में मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा, सड़क की दिशा बदलकर चुनिंदा जमीनों को अधिग्रहण में लाया गया, रिकॉर्ड में बैकडेट एंट्री और फर्जी बटांकन के आरोप
रायपुर। भारतमाला परियोजना के मुआवजा घोटाले में अब चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र के ग्राम सिवनीकला में कथित तौर पर सड़क की मूल दिशा बदलकर उसे सर्पाकार (सांप जैसी) आकृति दे दी गई, ताकि कुछ खास लोगों की जमीनें अधिग्रहण के दायरे में आ जाएं और करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा हासिल किया जा सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के पाइंट नंबर-21 के बाद सड़क को करीब 25 मीटर तक मोड़ा गया। इससे पहले जो जमीनें अधिग्रहण से बाहर थीं, वे अचानक प्रभावित श्रेणी में आ गईं और करोड़ों रुपये के मुआवजे की हकदार बन गईं। दावा है कि महज 4 करोड़ रुपये के वास्तविक मुआवजे वाली जमीन पर 15.50 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे शासन को करीब 11.50 करोड़ रुपये की चपत लगी।
जांच में यह भी सामने आया है कि केवल 19 खसरों की 17.51 एकड़ जमीन को 84 से ज्यादा हिस्सों में बांटकर रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम दर्ज कराया गया। किसानों ने भुइंया पोर्टल में बैकडेट एंट्री, नामांतरण और रिकॉर्ड संशोधन के जरिए पूरे खेल को अंजाम देने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता कृष्णकुमार साहू के मुताबिक, पूरे मामले का कथित मास्टरमाइंड टिकेश्वर उर्फ टकेश्वर चंद्राकर है, जिसने 50 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। वहीं तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी, एसडीएम, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि भुइंया पोर्टल की लॉग हिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कर पूरे घोटाले का सच सामने लाया जाए।

