बैकुण्ठपुर। विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर रविवार को रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा गौतम सदन, एसईसीएल बैकुण्ठपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिले की कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने स्वयं रक्तदान कर एक प्रेरणादायक संदेश दिया कि रक्तदान किसी भी वर्ग, आयु या लिंग की सीमाओं से परे मानवता की सेवा का सर्वोत्तम माध्यम है। उनके साथ कई अधिकारियों और नागरिकों ने भी रक्तदान किया। विशेष रूप से योगेंद्र मिश्रा ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर रक्तदान कर समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया।
कलेक्टर रोक्तिमा यादव द्वारा रक्तदान किए जाने को कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जा रहा है। एक महिला अधिकारी के रूप में उन्होंने स्वयं रक्तदान कर यह संदेश दिया कि महिलाएं भी इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा सकती हैं। कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक पहल बताया और उम्मीद जताई कि इससे जिले में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
हालांकि कार्यक्रम की सफलता के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, एसईसीएल से जुड़े लोगों तथा विभिन्न समूहों की उपस्थिति के बावजूद रक्तदान शिविर में केवल लगभग 30 यूनिट रक्त का ही संग्रह हो सका। इसे लेकर शहर में चर्चा का माहौल है कि आखिर इतने बड़े आयोजन में रक्तदान की संख्या अपेक्षा से काफी कम क्यों रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बैकुण्ठपुर और कोरिया जिले के युवा समय-समय पर रक्तदान कर जरूरतमंदों की सहायता करते रहे हैं। कई अवसरों पर युवाओं के छोटे-छोटे समूहों ने 10 से 15 यूनिट तक रक्तदान कर मिसाल पेश की है। ऐसे में जब पूरा जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता एक मंच पर मौजूद थे, तब केवल 30 यूनिट रक्त संग्रह होना चिंतन का विषय माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी की थी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह तथा जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. आयुष जायसवाल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने शिविर के आयोजन और प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग की ओर से लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने का हर संभव प्रयास किया गया।
इसके बावजूद यह चर्चा भी रही कि कार्यक्रम में शामिल कई लोग केवल उपस्थिति दर्ज कराने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने तक सीमित रहे। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि ऐसे लोग स्वयं रक्तदान करते या कम से कम कुछ अन्य लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करते, तो संग्रहित रक्त की मात्रा कई गुना अधिक हो सकती थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि रक्तदान केवल एक दिन का अभियान नहीं बल्कि निरंतर चलने वाली सामाजिक जिम्मेदारी है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को भी इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। रक्त की आवश्यकता किसी भी समय किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों को नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह शिविर निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल रहा, लेकिन रक्तदान की संख्या यह भी संकेत देती है कि जिले में जागरूकता बढ़ाने की अभी काफी आवश्यकता है। कलेक्टर रोक्तिमा यादव द्वारा किया गया रक्तदान आने वाले समय में लोगों के लिए प्रेरणा बनेगा। यदि समाज के सभी वर्ग इसी भावना के साथ आगे आएं, तो भविष्य में ऐसे शिविरों में 30 नहीं बल्कि सैकड़ों यूनिट रक्त संग्रह कर कोरिया जिले को एक नई पहचान दिलाई जा सकती है।

