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आंध्र सीमा पर मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली हिड़मा ढेर

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सुकमा, 18 नवम्बर । आंध्र प्रदेश के ऑलूरी सीतारामाराजू जिले के मारेडूमिल्ली जंगल में आज सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हिडमा पर सुरक्षा बलों और नागरिकों पर कम से कम 26 बड़े हमलों की कमान संभालने का आरोप था। यह मुठभेड़ आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमाओं से जुड़े घने जंगलों में हुई, जहां माओवादियों के कई ठिकाने मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ स्थल पर कम से कम छह माओवादियों के शव मिले हैं और सुरक्षा बल अभी भी इलाके में अभियान जारी रखे हुए हैं। आंध्र प्रदेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस हरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि मुठभेड़ सुबह छह बजे से सात बजे के बीच हुई।

उन्होंने कहा कि गोलीबारी में छह माओवादी मारे गए हैं जिनमें एक शीर्ष माओवादी नेता भी शामिल है और पूरे क्षेत्र में व्यापक कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। माडवी हिडमा का जन्म 1981 में सुकमा में हुआ था और वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की एक बटालियन का प्रमुख था। वह CPI माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य और बस्तर क्षेत्र से शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी सदस्य था। उसके सिर पर पचास लाख रुपये का इनाम था। मुठभेड़ में उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का के मारे जाने की भी जानकारी मिली है। हिडमा कई बड़े नक्सली हमलों का मुख्य चेहरा रहा है। इनमें 2010 में दंतेवाड़ा में हुआ हमला जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए, 2013 का झीरम घाटी हमला जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मारे गए और 2021 का सुकमा बीजापुर एंबुश जिसमें 22 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए, शामिल हैं। हिडमा की मौत को सुरक्षा एजेंसियां माओवादियों के लिए बड़ा झटका मान रही हैं, खासकर ऐसे समय जब उनके खिलाफ लगातार अभियान और आत्मसमर्पण की घटनाओं ने उनकी ताकत कम कर दी है।

पिछले महीने  में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि चौबीस घंटों में तीन सौ से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। प्रधानमंत्री ने कहा था कि माओवादी लंबे समय तक स्कूल, अस्पताल और विकास कार्यों को रोककर युवाओं के साथ अन्याय करते रहे। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास कर रही है और आज उसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाओं में प्रमुख माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने भी चौदह अक्टूबर को आत्मसमर्पण किया था। भूपति ने अपने साथियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज के बीच काम करने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि हथियार उठाने से वे जनता से दूर हो गए हैं और यह रास्ता असफल हो चुका है।

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