CGMSC Case: रायपुर/ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 05.02.2026 के आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई थी। जिस पर 07 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में CGMSCL की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) कौस्तुभ शुक्ला ने याचिका की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में आवश्यक विधिक कार्यवाही का संचालन किया। सुनवाई के उपरांत माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को निर्धारित की है।भौगोलिक संदर्भ Also Read – ग्रामीण के घर में लगी आग, नकदी कपड़े और घरेलू सामान जलकर खाक सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा CGMSCL पर लगाए गए ₹1,00,000/- के प्रतिकार (Compensation) के भुगतान तथा आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों (Adverse Observations) पर अगली सुनवाई तक रोक (Stay) लगा दी है। यह महत्वपूर्ण अंतरिम राहत CGMSCL के अध्यक्ष दीपक म्हास्के एवं प्रबंध संचालक ऋतेश कुमार अग्रवाल (IAS) के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में मामले को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने अपने संबंधित विधिक विभाग को निर्देशित किया था।
पूर्व में मामला इस प्रकार है,सीजीएमएससी के अफसरों की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट के डिविजन बेंच ने फटकार लगाई थी ज्ञात हो कि सीजीएमएससी के अफसरों ने निविदा जारी करते समय कम रेट के के बजाए अधिक रेट वाले को टेंडर दे दी थी मामले की सुनवाई पर चीफ जस्टिस रमेश चंद्र सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बतौर क्षतिपूर्ति के याचिका कर्ता को एक लाख रु का भुगतान करने का निर्देश सीजीएमएससी को दिया था।
सीजीएमएससी के इस कार्यवाही को चुनौती देते हुए दुर्गा मेडिकल घेरघोड़ा जिला रायगढ़ निवासी नटवर लाल अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा के माध्यम से हाईकोर्ट मे याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने उसकी बोली को अयोग्य घोषित करने और 23सितम्बर 2025के तहत अनुबंध हितेश सूर्यवंशी को प्रदान करने के संबंध में सीजीएमएससी की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी याचिका के अनुसार वह बी श्रेणी का पंजीकृत सिविल ठेकेदार है।

