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CBSE New Language Policy: 7वीं, 8वीं और 9वीं के छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, तीसरी भाषा पर आया नया नियम

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CBSE New Language Policy: नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लागू करने का दिशानिर्देश जारी की है। हालांकि, कक्षा 10वीं के वर्तमान बैच पर यह नई नीति लागू नहीं होगी। इससे बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को राहत मिलेगी।

CBSE की नई गाइडलाइन के अनुसार, फिलहाल कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे छात्रों को 10वीं में जाने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की जरुरत नहीं होगी। लेकिन, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं रखी हैं, वे उन्हीं भाषाओं के साथ-साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा भी पढ़ेंगे।

बोर्ड ने आश्वासन दिया है कि भाषा सीखने की प्रक्रिया को आसान और आकर्षक बनाया जाएगा। छात्रों को उनके क्लास के हिसाब से समयबद्ध तरीके से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

CBSE ने स्पष्ट किए नियम

2026-27 शैक्षणिक सत्र में 9वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा (R3) का मूल्यांकन केवल विद्यालय के आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा। वहीं जब ये छात्र 2027-28 में 10वीं कक्षा में पहुंचेगे, तब भाषा के लिए CBSE बोर्ड की कोई परीक्षा नहीं होगी।

बोर्ड ने कक्षा सातवीं और आठवीं में पढ़ रहे छात्रों के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए हैं। जब ये छात्र कक्षा नौवीं और दसवीं में जाएंगे, तो वे तीन भाषाओं का अध्ययन जारी रखेंगे, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होंगी।

राहत वाली बात यह है कि 7वीं और 8वीं में पढ़ रहे वर्तमान बैच के छात्र जिसने पहले ही दो गैर-मातृभाषाओं का चयन कर लिया है, उन्हें सिर्फ एक भारतीय भाषा का चयन करना होगा और कक्षा 10 तक उस भाषा को रखना होगा। वर्तमान कक्षा 9 के बैच की तरह, तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल के आंतरिक मूल्यांकन के माध्यम से किया जाएगा, और इसके लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।

इन्हें मिलेगी छूट

CBSE ने तीन-भाषा नीति के तहत कुछ छूटों की भी घोषणा की है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN) को विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दी जाने वाली छूट और रियायतें मिलती रहेंगी। वहीं भारत के बाहर स्थित सीबीएसई स्कूलों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय मातृभाषा पढ़ाने से पूर्णतः छूट दी गई है। इसके अलावा भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को भी तीसरी भाषा के रूप में भारतीय मातृभाषा पढ़ने से छूट दी गई है।

 

 

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