Nasrapur Case: पुणे। महाराष्ट्र के नसरपुर में 4 साल की बच्ची का रेप और मर्डर केस में पुणे की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने आरोपी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट के तहत चले इस मुकदमे में 55 दिन बाद अदालत का फैसला आया है।
भोर तहसील में चार साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या के इस मामले में 65 साल के भीमराव कांबले को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका था और कोर्ट को उम्रकैद या मौत की सजा में से किसी एक पर फैसला करना था।
फैसले का दौर तब आया जब कोर्ट ने कई गवाहों की गवाही रिकॉर्ड की और बड़े पैमाने पर फोरेंसिक और हालात के सबूतों की जांच की, जिसके कारण 25 जून को सजा हुई।
नसरपुर मामले की टाइमलाइन
1 मई, 2026 – अपराध की सूचना और आरोपी की गिरफ्तारी
नसरापुर गांव में अपनी दादी के घर के बाहर खेल रही चार साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। एक गौशाला में ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। ग्रामीणों ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
2-3 मई, 2026 – लोगों का गुस्सा और SIT का गठन
इस घटना के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें नवाले ब्रिज के पास हाईवे जाम करना भी शामिल था। पीड़िता का अंतिम संस्कार पुलिस सुरक्षा में किया गया। जांच में तेजी लाने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई।
4-10 मई, 2026 – राजनीतिक प्रतिक्रिया और परिवार की अपील
राजनीतिक नेताओं ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की, जबकि पिता ने न्याय मिलने तक निजता बनाए रखने की सार्वजनिक अपील की। राज्य सरकार ने फास्ट-ट्रैक जांच और मुकदमा चलाने का भरोसा दिया।
16 मई, 2026 – चार्जशीट दाखिल
पुलिस ने 15 दिनों के भीतर 1,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें फोरेंसिक और डीएनए सबूत शामिल थे।
28 मई, 2026 – आरोप तय, फास्ट-ट्रैक ट्रायल शुरू
अदालत ने POCSO और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए और रोजाना इन-कैमरा सुनवाई का आदेश दिया।
21 जून, 2026 – आखिरी बहस पूरी
55 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद दोनों पक्षों ने अपनी अंतिम बहस पूरी की। अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की।
25 जून, 2026 – दोषी करार दिया गया
अदालत ने भीमराव कांबले को अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी पाया और सबूतों की अटूट कड़ी का जिक्र किया।
29 जून, 2026 – मौत की सजा।
अदालत ने कांबले को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई।

