चाय पर चर्चा: कलेक्ट्रेट की गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक इन दिनों एक ही चर्चा गर्म है। बताया जा रहा है कि एक डिप्टी कलेक्टर, जिनकी सेवानिवृत्ति में महज दो-तीन दिन बचे हैं, नजूल विभाग की लंबित फाइलों के निपटारे में असाधारण तेजी दिखा रहे हैं।
चर्चाओं का बाजार तो यहां तक गर्म है कि कुछ मामलों में न्यायालय के आदेशों के विपरीत फैसले किए जाने और दोनों पक्षों से कथित लेन-देन की बातें भी सामने आ रही हैं। चर्चा यह भी है कि रिटायरमेंट से पहले अधिक से अधिक विवादित प्रकरणों का निपटारा कर कथित रूप से आर्थिक लाभ लेने की होड़ मची हुई है।
सूत्रों का दावा है कि कई ऐसे मामलों में तेजी से आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिन पर लंबे समय से कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अचानक यह सक्रियता क्यों? क्या यह महज संयोग है, या फिर रिटायरमेंट से पहले “आखिरी कमाई” की कोशिश?
यदि इन चर्चाओं में जरा भी सच्चाई है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए और यदि कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके।
चाय पर चर्चा है… सच क्या है, यह जांच के बाद ही साफ होगा।
पत्रकार दीपक तिवारी

