चाय पर चर्चा: जिले में इन दिनों आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चौपालों चाय की दुकानों और सरकारी दफ्तरों के गलियारों में खूब चर्चा सुनाई दे रही है। चर्चा का केंद्र बने हुए हैं दो आबकारी सब इंस्पेक्टर जिन पर पहले से ही आदिवासी क्षेत्रों में कथित अवैध वसूली के आरोप लगते रहे हैं। अब मामला उस समय और गंभीर हो गया जब विभाग की कार्रवाई के दौरान एक आदिवासी युवक के फरार होने की घटना सामने आ गई। बताया जा रहा है कि युवक पिछले कई दिनों से लापता है और उसके परिजनों द्वारा प्रशासन से शिकायत भी की जा चुकी है।
चर्चा यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों पर निलंबन की तलवार लटकने लगी है। जिले में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस व्यक्ति को विभागीय निगरानी में होना चाहिए था, वह कैसे फरार हो गया और इतने दिनों बाद भी उसका कोई पता क्यों नहीं चल पाया। आदिवासी समाज के बीच भी इस मामले को लेकर नाराजगी और चिंता का माहौल बताया जा रहा है।
इधर, चाय की चुस्कियों के साथ एक नई चर्चा भी तैरने लगी है। सूत्रों के हवाले से लोग दावा कर रहे हैं कि संभावित कार्रवाई से बचने के लिए कुछ अधिकारी अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाने और उन्हें असहज स्थिति में डालने की कोशिश कर रहे हैं। चर्चा यह भी है कि यदि उनके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई होती है तो वे अपने ही विभाग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों का सहारा ले सकते हैं।
हालांकि इन चर्चाओं और दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिले में यह मामला अब केवल एक फरारी का नहीं बल्कि विभागीय जवाबदेही, कार्यप्रणाली और अंदरूनी खींचतान का विषय बनता जा रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर सच क्या है, फरार व्यक्ति कहां है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी।
चाय पर चर्चा में फिलहाल इतना ही… बाकी सच क्या है, यह तो जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा, लेकिन जिले की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस मामले की गर्माहट लगातार बढ़ती नजर आ रही है। ☕
पत्रकार दीपक तिवारी

