BREAKING : नई दिल्ली। धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है। मस्जिद पक्ष को अलग जमीन दी जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार से याचिका करे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करते हुए इसे मंदिर माना है। मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे। कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।
हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले को लेकर पिछले चार साल से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर करार दिया है। इस फैसले के बाद से हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है।

