CG ACCIDENT: बिलासपुर में एक बार फिर सड़क पर प्रशासनिक लापरवाही भारी पड़ती नजर आई। अशोक नगर चौक से साइंस कॉलेज जाने वाले रास्ते पर डिवाइडर और बिजली खंभे लगाने के लिए सड़क के बीच गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया। न पुख्ता बैरिकेडिंग… न चेतावनी बोर्ड… और न ही पर्याप्त रोशनी। नतीजा—सिर्फ 90 मिनट के भीतर चार सड़क हादसे हो गए, जिनकी तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गईं।
पहला हादसा शाम 7 बजकर 28 मिनट पर हुआ, जब गड्ढे और मलबे से उछलकर एक ई-रिक्शा पलट गया। गनीमत रही कि उसमें कोई सवारी नहीं थी।इसके बाद रात 8 बजकर 20 मिनट पर एक ई-रिक्शा एक्टिवा से टकरा गया। हादसे में तीन लोग सड़क पर गिर पड़े और रिक्शा उनके ऊपर पलट गया।
रात 8 बजकर 38 मिनट पर मिट्टी और मलबे से उछलकर सवारी भरी ऑटो पलट गई, जिसमें महिलाएं और बच्चे घायल हुए। फिर रात 8 बजकर 59 मिनट पर तेज रफ्तार बाइक मलबे से टकराकर फिसल गई और युवक करीब 30 फीट तक सड़क पर घिसटता चला गया।
हैरानी की बात यह है कि लगातार हादसों के बाद भी गुरुवार तक हालात नहीं बदले। मौके पर सिर्फ लकड़ी और लाल झंडी लगाकर औपचारिकता निभाई गई, लेकिन मजबूत बैरिकेडिंग अब तक नहीं की गई है।
तीन साल पहले मंगला-जोंकी सड़क निर्माण के दौरान भी इसी तरह की लापरवाही में एक युवक की जान चली गई थी। उस मामले में विरोध के बाद ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर पर एफआईआर दर्ज हुई थी।
अब सवाल यह है कि आखिर शहर की सड़कों पर मौत के गड्ढों के लिए जिम्मेदार कौन है? और कब तक लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ेगी?

