बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे होटल हेवन पार्क के ‘LIT (Life In Trance) क्लब’ की मनमानी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दिनों इस क्लब में देर रात तक चलने वाली गतिविधियों को लेकर मीडिया में खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हुईं, जिसके बाद प्रशासन के दावों और कार्रवाई पर बड़े सवाल उठे थे। लेकिन, इन खबरों का क्लब प्रबंधन पर रत्ती भर भी असर होता नहीं दिख रहा है।
आबकारी और पुलिस विभाग का आश्वासन, पर कार्रवाई ‘शून्य’
स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने इस संबंध में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि आबकारी विभाग के अधिकारियों से भी संपर्क कर लिखित और मौखिक शिकायतें की हैं। सूत्रों के अनुसार, आबकारी विभाग ने शिकायतकर्ताओं को यह आश्वासन दिया था कि मामले की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि, धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है।
लोगों का आरोप है कि मीडिया में मामला आने के बावजूद, शनिवार रात को भी क्लब में नियमों की धज्जियां उड़ती रहीं और रात के 1 बजे तक महफिल सजी रही। साथ ही, क्लब में क्षमता से अधिक भीड़ (ओवरक्राउडिंग) होने की स्थिति बनी हुई थी, जिससे सुरक्षा के मानक पूरी तरह ध्वस्त नजर आए। पुलिस का पिछले रविवार रात मौके पर पहुँचना भी मात्र एक ‘खानापूर्ति’ बनकर रह गया, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
सुरक्षा और शांति पर गंभीर खतरा
रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र के बीच स्थित इस क्लब के कारण स्थानीय परिवारों का जीना मुहाल हो गया है। रात 2 बजे तक तेज म्यूजिक और नशे में धुत होकर निकलने वाले लोगों की आवाजाही के कारण क्षेत्र की शांति भंग हो रही है। क्लब में क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण किसी भी समय बड़ी दुर्घटना या भगदड़ की आशंका बनी रहती है, जिसे लेकर स्थानीय निवासियों में भारी रोष है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और लाइसेंस निरस्ती की मांग
बढ़ते विवाद और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों तथा सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग से उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है। नागरिकों की मुख्य मांगें निम्न हैं:
सीसीटीवी फुटेज: परिसर और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि समय और गतिविधियों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
लाइसेंस पर कार्रवाई: यदि निर्धारित समय सीमा के बाद संचालन और क्षमता से अधिक भीड़ जुटाने की पुष्टि होती है, तो तत्काल LIT क्लब का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
रसूख के आगे नियम बौने?
शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि जब अन्य प्रतिष्ठानों पर नियमों का डंडा चलता है, तो इस क्लब को ऐसी ‘विशेष छूट’ क्यों दी जा रही है? क्या आबकारी विभाग का मौन किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा है?
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) पंकज कुमार पटेल ने इस पर कहा है कि, “फिलहाल यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा कुछ पाया जाता है जो नियमों के विरुद्ध है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
अब देखना यह है कि लगातार मिल रहे आश्वासनों के बाद क्या आबकारी और पुलिस विभाग अपनी साख बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

