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महाराष्ट्र मंडल बनाएगा गुरुकुल और गौशाला, 2027 होगा ‘सामाजिक जन जागरण वर्ष’

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रायपुर। महाराष्‍ट्र मंडल के अध्‍यक्ष अजय मधुकर काले ने नई कार्यकारिणी व विभिन्‍न समितियों के भावी पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ शुक्रवार को हुई महत्‍वपूर्ण बैठक में कहा कि मंडल अगले दो सालों में गुरुकुल और गौशाला शुरू करने के लक्ष्‍य को हासिल कर लेगा। काले मंडल के अगले 10 सालों की कार्ययोजनों को लेकर बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा शंकर नगर बाल वाचनालय की तर्ज पर महाराष्‍ट्र मंडल रोहिणीपुरम सहित रायपुर के कम से कम तीन स्‍थानों पर नगर निगम अथवा रायपुर विकास प्राधिकरण की जगह पर भवन बनाकर वहां के लोगों के बीच, बाल संस्कार शिविर, सामाजिक जन जागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित करेगा।

काले ने कहा कि अगले साल यानी 2027 को महाराष्‍ट्र मंडल सामाजिक जन जागरण वर्ष के रूप में मनाएगा। सालभर शहर के विभिन्‍न क्षेत्रों में संगोष्‍ठी, विचार विमर्श होंगे। मराठी समाज के लोगों को सामाजि‍क सरोकारों से जोड़ने, संस्‍कारों व परंपराओं से नए सिरे से अवगत कराने के लिए कई तरह के अभियान चलाए जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि अध्यक्ष के रूप में नए कार्यकाल में कुछ और नई समितियां बनाईं जा रहीं हैं। कुछ पुरानी समितियों को नया स्‍वरूप भी दिया जा रहा है। सभी समितियों में समन्‍वयक, प्रभारी, सह प्रभारी समेत कुल 14 पदाधिकारी रखे जाएंगे। अपनी- अपनी टीम बनाने की जिम्‍मेदारी समिति समन्‍वयक व प्रभारी की होगी।

इससे पहले स्‍वास्‍थ्‍य समिति की समन्‍वयक डॉ. कमल वर्मा ने कहा कि बच्‍चों को बचपन से ही संस्‍कार देना चाहिए। सही मायनों में गर्भावस्‍था में ही बच्‍चों को संस्‍कार मिलने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। आज घरों में विघटन की बड़ी वजह ईगो है। यदि हम अपने आप से ईगो हटा लें, अपने घर के सदस्‍यों से नाराजगी, उपेक्षा की नजरअंदाज करें, तो निश्‍चत ही हमारे घर में एकजुटता बनी रहेगी। बृहन्‍महाराष्‍ट्र मंडल के छत्‍तीसगढ़ प्रभारी सुबोध टोले ने कहा कि कमी हमारे बच्‍चों में नहीं, हम में ही है, जिसे दूर करने की जरूरत है। हम जल्‍दी नहीं उठेंगे, तो हमारे बच्‍चे भी देर से उठेंगे। हम पूजा- पाठ से दूर रहेंगे, तो बच्‍चों से पूजा, आरती, संस्‍कार और मंत्रोच्‍चार की उम्‍मीद नहीं कर सकते।

दिव्‍यांग बालिका विकास गृह के प्रभारी प्रसन्‍न निमोणकर ने कहा कि महाराष्‍ट्र मंडल परिवार परामर्श समिति गठित रहा है। साथ ही वर- वधु की तलाश कर रहे अभिभावकों को मार्गदर्शन देने की जरूरत है, ताकि वे अपने बच्‍चों की शादी नौकरी या पैकेज से करने के बजाय उनके लिए बेहतर जीवन साथी की तलाश करें। निमोणकर ने कहा कि‍ बच्‍चों को उच्‍च शिक्षा हम ही देते हैं। उन्‍हें उड़ना भी हम ही सिखाते हैं। जब बच्‍चे बहुत ऊंची उड़ान भरते हैं तो उन्‍हें वहां से चौबे कॉलोनी, समता कॉलोनी, तात्‍यापारा, बूढ़ापारा दिखाई नहीं देते, उन्‍हें दिखाई देता है गुड़गांव, नोएडा, हैदराबाद, बंगुलुरु, पुणे से लेकर यूके, यूएसए, ऑस्‍ट्रेलिया। फिर वे लौटकर नहीं आते। इसके लिए जिम्‍मेदार हम ही हैं।

बैठक का संचालन कर रहे सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने कहा कि लड़की की शादी जोड़ने के लिए निकले माता- पिता को लड़के के पास कार, मकान और बड़ा सा बैंक बैलेंस चाहिए। सवाल ये है कि क्‍या लड़की के प‍िता के पास शादी से पहले वो सभी चीजें और सुविधाएं थीं, जो वो अपने भावी दामाद के पास देखना चाहते हैं। चेतन ने कहा कि शादी के बाद भी मां के अपनी नव विवाहित बेटी के पास लगातार मोबाइल कॉल आते रहते हैं और वो अपनी बेटी के अभी- अभी शुरू हुए वैवाहिक जीवन में न केवल दखल देतीं हैं, बल्कि अपने सास- ससुर से अलग होने के लिए भड़काती भी हैं। इसलिए परिवार परामर्श समिति की आवश्‍यकता अधिक जान पड़ती है।

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