कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने को लेकर रविवार को टीएमसी कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराते हुए जोरदार हमला बोला।
बंगाल के बांकुड़ा जिले के विष्णुपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम ने विशेषकर टीएमसी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उसने कांग्रेस के साथ साजिश रचकर बंगाल की बहनों के साथ एक और धोखा किया है।
मोदी ने कहा कि भाजपा की पहचान ही महिला सशक्तीकरण से है, महिला सुरक्षा से है इसीलिए देश के हर राज्य में बहन-बेटियां भाजपा को सबसे अधिक आशीर्वाद देती हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत बनाने में बेटियों की भूमिका का विस्तार हो, राजनीति में भी ज्यादा से ज्यादा बेटियां आएं लेकिन आपने देखा होगा कि संसद में क्या हुआ।
टीएमसी ने बंगाल की बहनों के साथ एक और धोखा किया है। बंगाल की महिलाएं 33 प्रतिशत आरक्षण चाहती थीं। मोदी ने यह सुनिश्चित किया। हम चाहते थे कि इसे 2029 से लागू किया जाए, लेकिन टीएमसी नहीं चाहती थी कि बंगाल की बेटियां ज्यादा संख्या में एमएलए और एमपी बनें क्योंकि बंगाल की बेटियां इनके महा जंगलराज को चुनौती दे रही हैं। इसलिए टीएमसी ने कांग्रेस के साथ मिलकर साजिश रची, ताकि यह बिल पारित न हो पाए।
टीएमसी को विश्वासघात की महा सजा मिलेगी
मोदी ने बंगाल की महिलाओं से परिवर्तन का आह्वान करते हुए टीएमसी ने उनके साथ जो विश्वासघात किया है, इसके लिए महा जंगलराज वाली टीएमसी सरकार को महा सजा मिलनी चाहिए। मोदी ने आगे कहा कि टीएमसी आदिवासी बहन- बेटियों से भी बहुत नफरत करती है। भाजपा ने पहली आदिवासी राष्ट्रपति देश को दिए, लेकिन टीएमसी ने आदिवासी बेटी द्रौपदी मुर्मु के सामने अपना अलग उम्मीदवार उतार दिया था।
जैसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संविधान निर्माता बाबा साहब डा भीमराव अंबेडकर के खिलाफ उम्मीदवार उतारा था। मोदी ने कहा कि टीएमसी नहीं चाहती थी कि आदिवासी बेटी द्रौपदी मुर्मु राष्ट्रपति बने। मोदी ने पिछले दिनों राष्ट्रपति मुर्मु के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकाल उल्लंघन को लेकर भी घेरा। कहा कि दुनिया भारत की राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन टीएमसी अपमान करती है, जिसे पूरे देश में देखा। बंगाल की बहनें आदिवासी समाज की बेटी व राष्ट्रपति के अपमान को कभी नहीं भूलेंगी।
टीएमसी को इसकी सजा मिलकर रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वही टीएमसी है, जो घुसपैठियों को लाभ देने के लिए हर कानून-नियम तोड़ देती है। ये वही टीएमसी है, जो धर्म के आधार पर आरक्षण देने में जुटी है। संविधान की भावनाओं का गला घोटने में लगी हुई है।
‘जनता को डराने वाली टीएमसी बंगाल टाइगर की दहाड़ से डर गई है’
मोदी ने कहा कि मैं बंगाल में जहां भी जाता हूं, हर जनसभा, पहले से ज्यादा बड़ी होती जा रही है। यह माहौल, प्यार, उत्साह, उमंग और यह निर्मम सरकार के प्रति गुस्से का भी प्रतीक है। जो टीएमसी अब तक बंगाल की जनता को डराती थी, वह बंगाल टाइगर की दहाड़ से खुद डर गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल टाइगर- बंगाल की जनता है। बंगाल की जनता दहाड़ रही है कि अब नहीं सहेंगे टीएमसी का अत्याचार। टीएमसी की निर्मम सरकार को हटाकर रहेंगे।
गुंडों, सिंडिकेट माफिया व भ्रष्टाचार्यों को पीएम ने सरेंडर करने की चेतावनी दी
प्रधानमंत्री ने इस दौरान पहली बार यह अभी कहा कि मैं टीएमसी के सभी गुंडों, सिंडिकेट माफिया और भ्रष्टाचारियों को एक आखिरी मौका देता हूं। 29 अप्रैल से पहले वे सभी अपने-अपने थाने में जाकर आत्मसमर्पण कर लें, क्योंकि चार मई के बाद कोई भी उन्हें बचा नहीं पाएगा।
मोदी ने इस दौरान कहा कि टीएमसी का भय-काल जाने वाला है और भाजपा के भरोसे का सेवा काल आने वाला है।बंगाल में जब भाजपा सरकार बनेगी तो गरीबों को मुफ्त राशन मिलेगा। कोई आपका राशन छीन नहीं पाएगा। बंगाल की भाजपा सरकार महिलाओं को पक्का घर बनाने के लिए पीएम आवास योजना के तहत 1.5 लाख रुपये तक की मदद देगी।
निर्मम सरकार ने यहां आयुष्मान योजना रोक रखी है। बंगाल में भाजपा सरकार बनते ही महिलाओं को पांच लाख रुपये तक की मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। भाजपा सरकार बनने पर बंगाल में महिलाओं को साल में 36,000 रुपये मिलेंगे।
पीएम मोदी के बयान पर ममता बनर्जी का पलटवार
बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को गुमराह करने का प्रयास किया है, ईमानदारी से संबोधित करने के बजाय। त्रिणमूल कांग्रेस हमेशा महिलाओं को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की पक्षधर रही है। लोकसभा में हमारे 37.9% और राज्यसभा में 46% सदस्य महिलाएं हैं।
महिला आरक्षण का विरोध कभी नहीं रहा। हमारा विरोध केवल मोदी सरकार के परिसीमन अभ्यास से है, जिसमें महिलाओं को ढाल बनाकर भाजपा शासित राज्यों को अधिक सीटें देने और संघीय लोकतंत्र पर हमला करने की साजिश है।
यदि सरकार गंभीर होती तो महिला आरक्षण विधेयक पास होने के तीन साल बाद अचानक इसे चुनावों के समय क्यों लाया गया और परिसीमन से क्यों जोड़ा गया? त्रिणमूल कांग्रेस दशकों से महिलाओं के लिए लड़ रही है, लेकिन हम इस पाखंड को सहन नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री को चाहिए कि अगली बार संसद में जवाबदेही के साथ बोलें, न कि कायरतापूर्ण तरीके से।

