पत्रकार दीपक तिवारी
कबीरधाम जिले की चौपालों, पान ठेलों और चाय की दुकानों में इन दिनों एक ही नाम गूंज रहा है—एक ऐसे सेठ जी का, जिनकी दौलत की रफ्तार देखकर बड़े-बड़े कारोबारी भी हैरान हैं।
चर्चा है कि पिछले महज तीन सालों में 1000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति खड़ी कर दी गई। लोग कहते हैं—“भाई, हमने तो जिंदगी भर नौकरी कर ली, लेकिन ऐसा पैसा तो फिल्मों में ही देखा था!”
अब सवाल यही उठ रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा जादुई बिजनेस है जो दिखता भी नहीं और नोटों की बारिश भी करता है?
🔎 चर्चा के मुख्य बिंदु:
शहर में दो-दो बड़े होटल और मॉल खड़े हो गए
कवर्धा के आसपास 40-50 एकड़ जमीन की खरीद
शहर के अंदर तेज़ी से प्लॉटिंग का खेल
एक ही झटके में 11 करोड़, 40 करोड़ की डील
लोग हैरान हैं—“इतना पैसा आखिर आता कहां से है?”
कुछ लोग धीरे से कान में कहते हैं— “ये सिर्फ जमीन का खेल नहीं है…”
“बिजनेस कुछ और है, जो सामने नहीं आता…”
“ऊपर तक पहुंच है तभी सब मुमकिन है…”
तो वहीं कुछ लोग इसे तेज दिमाग और सही समय पर सही निवेश बता रहे हैं।
लेकिन चाय की हर चुस्की के साथ एक सवाल जरूर उठता है—
“क्या ये सब पारदर्शी है… या कहानी में कोई ट्विस्ट बाकी है?”
गांव से लेकर शहर तक चर्चा गर्म है, लेकिन सच क्या है—ये अभी भी परदे के पीछे है।
अब देखना ये है कि ये ‘रहस्यमयी रफ्तार’ सिर्फ किस्मत का खेल है या फिर कोई बड़ा राज छुपा है

