
बीजापुर ब्यूरो (समैया पागे ) | 8 अगस्त 2021- प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 20 वीं कड़ी में आदिवासी अंचलों की अपेक्षाओं और विकास विषय पर बातचीत करते हुए प्रदेशवासियों को परंपरागत हरेली तिहार की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा के अनुसार वर्ष का यह हमारा पहला त्यौहार है, इस त्यौहार पर अपने गांव-घर, गौठान की सफाई एवं पुताई कर गौधन की पूजा करते हैं। हल और अन्य कृषि कृषि यंत्रों की पूजा अर्चना करते हैं। छत्तीसगढ़िया भावना और परम्परा के अनुरूप हरेली सहित पांच त्यौहारों के लिए शासकीय अवकाश घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सरकार बनाने के बाद हमने पहले बार विश्व आदिवासी दिवस को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। जिससे सभी लोगों को आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, परम्परा तथा उनके उच्च जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने अगस्त महीने में आने वाले तीज- त्यौहारों की भी बधाई दी । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने विगत ढाई वर्षों में प्रशासन को जनता तक सुगम बनाने तथा आम जनता की सहूलियत हेतु 29 तहसीलें एवं 4 अनुविभाग गठित किया है,जिसमें अधिकांश आदिवासी इलाकों में ही हैं। सरकार की मंशा है कि नई प्रशासनिक इकाइयों के द्वारा आम जनता को अपनी भूमि, खेती-किसानी, बच्चों की पढ़ाई, रोजगार से सम्बंधित कामकाज निपटाने में आसानी होगी। वहीं जनकल्याणकारी योजनाओं-कार्यक्रमों का कारगर कार्यान्वयन होगा। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से वन वासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकार प्रदान करने सहित उनके आर्थिक विकास में व्यापक बदलाव लाने प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर में ढाई हजार रुपये से बढ़ाकर 4 हजार रुपये प्रति मानक बोरा करना, विभिन्न प्रकार के 52 लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदी, कोदो-कुटकी, रागी का समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था आदि इन वनवासी भाई-बहनों को खुशहाली की ओर निरन्तर अग्रसर करने हेतु सकारात्मक प्रयास है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इस रेडियो वार्ता का तन्मयता के साथ श्रवण करने वाले भैरमगढ़ ब्लॉक के नेलसनार ग्राम पंचायत के आयतू तेलम, बुगुर कड़ियम हूँगाराम कड़ियम आदि ग्रामीणों ने सरकार के प्रयासों को प्रशंसनीय निरूपित किया। वहीं क्षेत्र के पंचायत पदाधिकारियों ने आदिवासी क्षेत्रों में सरकार द्वारा किये जा रहे सकारात्मक प्रयासों से दीर्घकालिक बदलाव होने की उम्मीद जतायी।
