खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले की राजनीति में हड़कंप मच गया है, जिसकी वजह भाजपा से जुड़े जनपद सभापति सुधीर गोलछा पर महिला अधिकारी की ओर से लगाए गए गंभीर आरोप है। महिला अधिकारी का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उन्हें परेशान कर रहा था, अश्लील बातें करता था, शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालता था और विरोध करने पर धमकियां देता था। FIR दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार बताया जा रहा है। वहीं अब उसकी अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है।
क्या है पूरा मामला ?
पीड़िता के मुताबिक, आरोपी अक्सर ऑफिस पहुंचकर अकेले में बात करने का दबाव बनाता था। प्रशासनिक चर्चा के बहाने कर्मचारियों को बाहर भेजने की कोशिश करता और निजी जीवन को लेकर अभद्र टिप्पणियां करता था। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने धमकी भरे अंदाज में पूर्व CEO का हाल देख लिया है? जैसी बात कही, जिससे अधिकारी डर और तनाव में आ गईं।
महिला अधिकारी ने बताया कि आरोपी लगातार मोबाइल पर कॉल करता था, गंदी बातें करता था और मिलने का दबाव बनाता था। जब उन्होंने नंबर ब्लॉक किया तो आरोपी ने वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचा दी। इतना ही नहीं आरोपी ने उनके घर की जानकारी बताते हुए डराने की कोशिश भी की। काफी समय तक लोकलाज और बदनामी के डर से चुप रहने के बाद महिला अधिकारी ने आखिरकार छुईखदान थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1), 78 और 79 के तहत मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, FIR दर्ज होने के बाद आरोपी जनपद सभापति सुधीर गोलछा गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया। उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। अब पुलिस की कार्रवाई तेज होने और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे मामले ने भाजपा के महिला सम्मान और “बेटी बचाओ” जैसे नारों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि जब महिला अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का दावा कितना मजबूत है। जिले में यह मामला अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है।

