रवि सेन/बागबाहरा : बृजेश्वर महादेव मंदिर कसेकेरा की अलौकित शक्ति एवं मान्यताओं के कारण भक्तों का तांता महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास के सावन सोमवार में बहुतायत में देखने को मिलता है । बृजेश्वर महादेव मंदिर कसेकेरा में लोगो की आस्था पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूर्ति के कारण प्रख्यात है । ग्रामीणों के अनुसार ग्राम कोमा के मालगुजार केजुराम चन्द्राकर के पुत्र रत्न प्राप्ति की मनोकामना पूर्ति के बाद संकल्प अनुसार केजू चन्द्राकर द्वारा बृजेश्वर महादेव (महादेवा) मंदिर कसेकेरा का निर्माण सन 1976 में कराया गया था । बागबाहरा ब्लॉक मुख्यालय से 12 किमी की दूरी पर कसेकेरा ग्राम में स्थित स्वंयम्भू बृजेश्वर महादेव मंदिर महादेवा स्थित है । प्रत्येक वर्ष श्रावण माह एवं महाशिवरात्रि पर्व में भक्तों का मेला इस मंदिर में लगता है । महादेवा कसेकेरा एक प्राचीन ग्राम है जो कि 1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसके अवशेष बिखरे पड़े है ।आज भी इस प्राचीन मंदिर तक पहुचने के लिए पहाड़ियों के किनारे बनी कच्ची सड़क से होकर जाना पड़ता है । बतादे की सैकड़ो वर्ष पूर्व बसे प्राचीन स्थल जंगल मे तब्दील हो चुके थे वही 18 वी सदी में दैवीय उपासक रहे सुवरमाल के जमींदार ठाकुर सनमान सिंग द्वारा इस कसेकेरा को तंत्र साधना के रूप में चुनकर यह उपासना करते रहे । काफी अंतराल के बाद रायतुम ग्राम के गोंड़ परिवार की भक्तिन दाई व्याह कर कसेकेरा गांव में आई और परिवार को छोड़ शिव भक्ति में लीन हो गई कुछ दिनों बाद उस भक्तिन दाई को बृजेश्वर महादेव जी की शिव लिंग दिखाई पड़ी और उसके बाद से ग्रामीणों द्वारा मान्यता का अनुसार महादेवा कसेकेरा में बृजेश्वर महादेव की पूजा एवं उपासना की ख्याति दूर दूर तक फैलने लगी ।
गोढ़ी परम्परा से होती है पूजा
बृजेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग की पूजा गोंड़ी परम्परा अनुसार किया जाता है गोंड़ प्रजाति के लोग यहाँ पुजारी का काम करते है वही इस मंदिर के किनारे पाकेर पेड़ के नीचे मंडियापाट की स्थापना है जहाँ मौन पूजा किया जाता है जहाँ बलि प्रथा दिया जाता था ।

बृजेश्वर महादेव की ऐसे फैली मान्यता
बृजेश्वर महादेव मंदिर के अलौकिक मान्यताओं की बात करे वर्षों पूर्व क्षेत्र में भारी अकाल की स्थिति में एक ग्रामीण द्वारा क्रोधित होकर बृजेश्वर महादेव के शिवलिंग को कुल्हाड़ी से खंडित किया था जिसका प्रमाण आज भी बृजेश्वर महादेव शिवलिंग पर स्पष्ठ रूप से दिखाई पड़ता है । हालांकि इस घटना के बाद क्षेत्र में अच्छी वर्षा हुई और अनाज की पैदावार भी खूब हुई थी वही दूसरी मान्यता की बात कही तो कोमा गांव के मालगुजार केजुराम चन्द्राकर ने भी पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पर मंदिर बनाने का संकल्प लिया बाद में केजुराम चन्द्राकर को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिंसके बाद उन्होंने सन 1976 में महादेवा कसेकेरा में मंदिर का निर्माण कराया था । मान्यताओं एवं प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार जब भक्तिन दाई बृजेश्वर महादेव की उपासना में लीन रहती थी तब विषैले सांप – बिच्छू उनके शरीर पर लौटते रहते थे लेकिन कभी उनको नुकसान नही पहुचाया उसी मान्यता के अनुसार आज भी महादेवा मंदिर परिसर में नाग सर्प है जो पूरे परिसर में विचरण करता है लेकिन किसी भी भक्तों को नुकसान नही पहुचाया है । शिव भक्तों का मेला बृजेश्वर महादेव कसेकेरा में प्रत्येक वर्ष श्रावण माह में एवं महाशिवरात्रि में लगता है जहाँ हजारों की संख्या में शिवभक्त अपनी मनोकामना लेकर बृजेश्वर महादेव जी के दर्शन के लिये आते है ।

