चाय पर चर्चा: सहकारिता विभाग में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा गंगा दास मानिकपुरी को लेकर है। चर्चा यह है कि वर्षों से समिति प्रबंधक रहे गंगा दास मानिकपुरी को एक नहीं, बल्कि तीन सरकारी समितियों का प्रबंधन सौंप दिया गया। सवाल उठ रहा है कि क्या पूरे विभाग में कोई दूसरा योग्य प्रबंधक नहीं था, या फिर इसके पीछे कोई और वजह थी?
चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि गंगा दास मानिकपुरी पर पहले भी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में, उनके खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देना कई सवाल खड़े करता है।
लोग मांग कर रहे हैं कि जब वे पहली बार प्रबंधक बने थे तब उनकी चल-अचल संपत्ति कितनी थी और आज कितनी है, इसकी स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि सब कुछ नियमों के तहत हुआ है, तो सच सामने आना चाहिए, और यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
चर्चा का दूसरा बड़ा सवाल यह है कि तीन-तीन समितियों का प्रभार एक ही व्यक्ति को देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? क्या प्रबंधकों की कमी थी, या फिर इस फैसले के पीछे कोई विशेष कारण था?
चर्चा में यह भी मांग उठ रही है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया की जांच हो तथा उस समय निर्णय लेने वाले अधिकारियों, जिनमें प्रवेश तिवारी की भूमिका भी शामिल बताई जा रही है, की भी निष्पक्ष जांच की जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट: यह सामग्री सार्वजनिक चर्चाओं और लगाए जा रहे आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष केवल सक्षम जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय माना जा सकता है।
पत्रकार दीपक तिवारी

