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लवन गोठान में 30 से अधिक गायों की मौत! बारिश और ठंड में तड़पते रहे बेजुबान, नगर पंचायत की व्यवस्था पर गंभीर सवाल

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More than 30 cows died in Lawan Gothan! Voiceless in rain and cold, serious questions on the system of the Nagar Panchayat

बलौदाबाजार/लवन। नगर पंचायत लवन में गोठान की व्यवस्था और बेजुबान पशुओं की देखरेख को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अर्णव तूफान के प्रभाव से पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश और बढ़ती ठंड के बीच गोठान में 30 से अधिक गायों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। यदि यह आंकड़ा सही है तो यह महज पशुओं की मौत नहीं, बल्कि उनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

सूत्रों के मुताबिक मृत गायों की संख्या 30 के पार बताई जा रही है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी। बताया जा रहा है कि बारिश और ठंड के दौरान गायें खुले में रहने को मजबूर थीं। मृत पशुओं के शव कीचड़ और मिट्टी से सने मिले, जिससे गोठान में उपलब्ध सुविधाओं और पशुओं की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आखिर किसकी जिम्मेदारी थी बेजुबानों की सुरक्षा?

जब लगातार बारिश और ठंड का दौर चल रहा था, तब गोठान में पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शेड, सूखी जगह और अन्य जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए? क्या नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को पशुओं की स्थिति की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो समय रहते उन्हें बचाने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए?

मामले के सामने आने के बाद नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा आनन-फानन में मृत गायों को दफनाए जाने की बात सामने आई है। वहीं, इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले पर कुछ भी स्पष्ट बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।

मौतों की जांच होगी या मामला दफन हो जाएगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 30 से अधिक गायों की मौत किन परिस्थितियों में हुई? क्या पशुओं की मौत का पोस्टमार्टम कराया गया? क्या मृत पशुओं की संख्या और मौत के कारणों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया गया है? नगर पंचायत प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर बेजुबानों की मौत को भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

बेजुबान पशु अपनी पीड़ा अधिकारियों तक नहीं पहुंचा सकते, लेकिन उनकी सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है, उनसे जवाबदेही तय होना जरूरी है। अब जिला प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच, वास्तविक मृत पशुओं की संख्या का खुलासा और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए।

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