Prime Minister’s residence built on paper in Jamira Path! Accused of misleading the government
कुसमी (छत्तीसगढ़ वॉच ब्यूरो)। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जमीरा पाठ में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में कई हितग्राहियों के आवास अधूरे हैं, जबकि कुछ हितग्राहियों को वर्षों पहले राशि मिलने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। कहीं आवास प्लिंथ लेवल तो कहीं डोर लेवल तक ही बने होने की बात सामने आई है।
मामले में सबसे गंभीर सवाल आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज प्रगति को लेकर उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ मामलों में जियो-टैगिंग और तस्वीरों के माध्यम से निर्माण की प्रगति दर्शाई गई, जबकि मौके पर आवास अधूरे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित आवासों का भौतिक सत्यापन और विभागीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
*जमीनी हकीकत और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर?*
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन जमीरा पाठ में कुछ आवासों का निर्माण अधूरा होने और कुछ मामलों में लंबे समय से काम शुरू नहीं होने की शिकायतों ने योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों की शिकायतों के आधार पर यह जांच जरूरी है कि संबंधित हितग्राहियों को कितनी राशि और कब-कब जारी की गई। साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज निर्माण की प्रगति, जियो-टैग तस्वीरों, फोटो अपलोड की तारीखों और किस्त जारी करने की प्रक्रिया का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाना चाहिए।
*जियो-टैगिंग और किस्तों की जांच की मांग*
यदि किसी आवास की वास्तविक स्थिति से अलग तस्वीरें अपलोड कर निर्माण की प्रगति दर्शाई गई है, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अधूरे आवासों का निरीक्षण कब किया गया और निर्माण पूरा नहीं होने की स्थिति में आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
*सीईओ ने जीआरएस को दिया 15 दिन का समय*
इस मामले में जनपद पंचायत कुसमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुन्ने लाल धुर्वे ने कहा कि उन्होंने संबंधित ग्राम रोजगार सहायक (जीआरएस) को आवास पूर्ण कराने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। उन्होंने कहा, “अगर 15 दिनों में आवास पूर्ण नहीं होता है, तो हम कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।”
सीईओ के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित समयसीमा में अधूरे आवासों का निर्माण पूरा होता है या नहीं। साथ ही, जिन आवासों में वर्षों से निर्माण कार्य शुरू नहीं होने अथवा सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर होने के आरोप हैं, उनकी अलग से जांच होती है या नहीं।
*जांच के बाद तय हो जिम्मेदारी*
ग्राम पंचायत जमीरा पाठ में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण की स्थिति, हितग्राहीवार जारी राशि और जियो-टैगिंग रिकॉर्ड का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाना जरूरी है। यदि जांच में गलत प्रगति रिपोर्ट, अनियमितता या नियमों के विपरीत राशि जारी करने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या 15 दिनों में अधूरे आवास पूरे होंगे और संदिग्ध मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, यह आने वाला समय बताएगा।

