आरडीए की कचना-सड्डू नगर विकास योजना विवादों में घिरती जा रही है। आरोप है कि कचना में जमीन रखने वाली जिस फर्म से वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप जुड़ी हुई हैं, उसे कचना की जमीन के बदले सड्डू के व्यावसायिक क्षेत्र में महंगी जमीन आवंटित कर लाभ पहुंचाया गया। फिलहाल आरडीए ने योजना में दावे-आपत्तियां बुलाए हैं, लेकिन इसी के साथ योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठने लगे हैं।
आरडीए ने बयान जारी कर योजना को पारदर्शी बताया था। लेकिन दो दिन पहले समाजसेवी और चिकित्सक डॉ. राकेश गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ अवनीश शरण से मुलाकात कर जमीन आवंटन को लेकर सवाल उठाए। चर्चा है कि प्रतिनिधिमंडल के सवालों पर आरडीए प्रबंधन की ओर से ठोस जवाब नहीं मिल पाया। डॉ. गुप्ता पहले भी नगर विकास योजना में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा चुके हैं।
अब स्थिति यह है कि आरडीए प्रबंधन को सफाई देते नहीं बन रही है और मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। फिलहाल दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि जमीन आवंटन की पूरी कहानी सामने आने के बाद कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं। अभी कुछ और खुलासे बाकी बताए जा रहे हैं। आगे आरडीए क्या जवाब देता है और मामला किस दिशा में जाता है, इस पर सबकी नजर है।
जमीन का खेल और रिटायर्ड सलाहकार
प्रदेश में जमीन का खेल बड़े पैमाने पर चलने की चर्चा है। रायपुर और सरगुजा संभाग में जमीन की अफरा-तफरी से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इन मामलों में बड़े अफसरों की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
एक संभाग के शीर्ष अफसर की कार्यशैली इन दिनों खास चर्चा में है। बताया जाता है कि साहब ने एक रिटायर्ड कर्मचारी की बाकायदा सेवा ले रखी है। जमीन से जुड़े पेचीदा मामलों में आदेश से पहले सलाह भी उन्हीं की ली जाती है और आदेश टाइप कराने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के भरोसे है। यानी कलम अफसर की, लेकिन सलाह रिटायर्ड कर्मचारी की!
चर्चा तो यहां तक है कि आदिवासी जमीन से जुड़े एक मामले में एक कारोबारी ने साहब को लाखों रुपये दे दिए थे। जब आदेश तैयार करने की बारी आई तो रिटायर्ड कर्मचारी ने साहब को समझाया कि ऐसा आदेश भारी पड़ सकता है और फंसने की पूरी संभावना है। सलाह काम कर गई। साहब ने कारोबारी को काम करने से साफ मना कर दिया और कथित तौर पर रकम भी लौटा दी। अब साहब को कौन समझाए कि जमीन के खेल में सलाहकार बदलने से खेल के नियम नहीं बदलते!
चैम्बर में भी बदलाव की आहट
छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बदलाव के बाद अब चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में भी बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। चर्चा है कि रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल के पुत्र अभिषेक अग्रवाल (मोंटी) को युवा चैम्बर ऑफ कॉमर्स का चेयरमैन बनाया जा सकता है। मोंटी फिलहाल भाजपा शहर जिला के शिक्षा प्रकोष्ठ के संयोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बताया जाता है कि मोंटी को युवा चैम्बर की कमान सौंपने पर काफी पहले ही सहमति बन गई थी, लेकिन नियुक्ति का आदेश जारी नहीं हो पाया। चैम्बर में पदाधिकारियों की नियुक्ति में भाजपा संगठन के पदाधिकारियों की सहमति की भी चर्चा रही है। भाजपा की ओर से भूपेंद्र सिंह सवन्नी और नंदन जैन को इस संबंध में सुझाव देने के लिए अधिकृत किए जाने की बात सामने आई थी।
मोंटी के नाम पर सहमति बनने के बावजूद मामला अटका रहा। अब भाजपा संगठन में बदलाव के बाद चैम्बर में भी अटकी नियुक्तियों की फाइलें आगे बढ़ने की चर्चा है। ऐसे में मोंटी की युवा चैम्बर के चेयरमैन पद पर जल्द नियुक्ति का आदेश जारी होता है या नहीं, इस पर कारोबार जगत की नजर है।
कैबिनेट फेरबदल नहीं, यही टीम लड़ेगी चुनाव
भाजपा संगठन में हुए ताजा फेरबदल के बाद अब मंत्रिमंडल में भी बदलाव की अटकलें तेज हो गई थीं। यहां तक कि दीपावली तक नया मंत्रिमंडल बनने की चर्चा भी शुरू हो गई थी। लेकिन इन उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। संकेत हैं कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा और मौजूदा मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की संभावना कम है। ऐसे में मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे नए-पुराने विधायकों को अब टिकट की दौड़ में जगह बनाने के लिए अपना जुगाड़ अभी से भिड़ाना पड़ेगा।
झारखंड-छत्तीसगढ़ में नेताओं का एक्सचेंज ऑफर
छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच इन दिनों नेताओं का एक्सचेंज ऑफर चल रहा है। कांग्रेस ने झारखंड के सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया है, तो भाजपा ने छत्तीसगढ़ के संगठन मंत्री पवन साय को झारखंड की जिम्मेदारी सौंप दी है। पवन साय ने बैजनाथ धाम मंदिर में भगवान शिव को जल अर्पित कर झारखंड में अपना कामकाज शुरू कर दिया है। उधर, झारखंड के संगठन मंत्री कर्मवीर को छत्तीसगढ़ में संगठन की कमान सौंपी गई है। कांग्रेस के प्रभारी महासचिव सुखदेव भगत भी बस्तर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर सियासी जमीन टटोलने वाले हैं। भाजपा ने सौरभ सिंह को भी झारखंड का सह प्रभारी बनाया है। आने वाले दिनों में झारखंड के कुछ और कांग्रेस नेताओं के छत्तीसगढ़ आने की संभावना है।
बस्तर में होगी कैबिनेट की बैठक
बस्तर में अब सियासी गर्मी बढ़ने वाली है। नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के बाद विकास को गति देने के मुद्दे पर सरकार बस्तर पर विशेष फोकस कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल की बैठक जगदलपुर में कराने की तैयारी चल रही है। बैठक में बस्तर के विकास से जुड़े कई अहम फैसले लिए जाने की संभावना है। फिलहाल इसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

