BREAKING CG NEWS

स्कूल की घंटी बज रही थी या स्वागत की थाली? सेजस झलमला के बच्चों को करीब एक घंटे तक खड़ा रखने पर उठे सवाल

Share this

बालोद/झलमला। स्कूल में बच्चे पढ़ने जाते हैं या फिर सरकारी आयोजनों में स्वागत की कतार सजाने? यह सवाल इन दिनों सेजस झलमला के विद्यार्थियों से जुड़े एक वीडियो के सामने आने के बाद खड़ा हो गया है।

गंगा मैया प्रांगण में शेड निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान सेजस झलमला के दर्जनों छात्र-छात्राएं हाथों में फूलों की थालियां लेकर अतिथियों के स्वागत के लिए कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरा मामला विद्यालयीन समय का बताया जा रहा है। अब सवाल यह है कि जब बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, तब फूलों की थालियां किसके निर्देश पर थमा दी गईं?

पढ़ाई की जगह स्वागत की ड्यूटी?

प्राप्त वीडियो में विद्यार्थी निर्धारित स्थान पर कतारबद्ध नजर आ रहे हैं। उनके हाथों में फूलों की थालियां हैं और वे कार्यक्रम में पहुंचने वाले अतिथियों के स्वागत के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार विद्यार्थियों को करीब एक घंटे तक स्वागत के लिए खड़ा रखा गया। हालांकि, इस अवधि की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

लेकिन तस्वीरें और वीडियो अपने आप में एक सवाल जरूर छोड़ रहे हैं—

क्या विद्यालयीन समय में बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा जरूरी किसी कार्यक्रम का स्वागत था?

बच्चे पढ़ने आए थे या ‘वेलकम टीम’ बनने?

कार्यक्रम में प्रेमा साईं महाराज के स्वागत किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी दौरान गंगा मैया प्रांगण में शेड निर्माण के भूमि पूजन का आयोजन भी किया गया।

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि विद्यार्थियों को कार्यक्रम में किसके आदेश पर भेजा गया?

  • क्या विद्यालय की ओर से बाकायदा अनुमति ली गई थी?
  • क्या विद्यार्थियों की कक्षाएं प्रभावित हुईं?
  • क्या उनकी उपस्थिति विद्यालय में दर्ज हुई या कार्यक्रम स्थल पर?

और सबसे अहम—क्या स्कूल समय में बच्चों को इस तरह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम की स्वागत व्यवस्था में खड़ा रखना शिक्षा व्यवस्था के उद्देश्य से मेल खाता है?

‘नन्हे हाथों में फूल’ अच्छी तस्वीर है, लेकिन सवाल भी बड़ा है

बच्चों के हाथों में फूलों की थाली देखकर तस्वीर भले ही आकर्षक लगे, लेकिन शिक्षा के मंदिर से निकली यह तस्वीर कई गंभीर सवाल भी छोड़ जाती है।

क्योंकि बच्चों की मुस्कान के पीछे अगर उनकी छूटी हुई पढ़ाई छिपी हो, तो तस्वीर कितनी भी सुंदर हो, सवाल तो उठेंगे ही।

विद्यालय बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और भविष्य के लिए तैयार करने का स्थान है। ऐसे में सार्वजनिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी हो तो उसकी व्यवस्था, अनुमति, सुरक्षा और विद्यालयीन समय को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।

करीब एक घंटे तक खड़े रहने का दावा, पुष्टि बाकी

स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि विद्यार्थियों को करीब एक घंटे तक फूलों की थालियां लेकर स्वागत के लिए खड़ा रखा गया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विद्यालय अथवा शिक्षा विभाग के बयान के बाद ही हो सकेगी।

DEO-BEO से संपर्क का प्रयास, जवाब अब भी बाकी

मामले में विद्यालय और शिक्षा विभाग का पक्ष जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एवं खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क स्थापित नहीं हो सका।

अब सवाल यह भी है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करते?

सवाल बच्चों से नहीं, व्यवस्था से है

यह खबर बच्चों की भागीदारी के खिलाफ नहीं है। सवाल यह है कि क्या विद्यालयीन समय में विद्यार्थियों को पढ़ाई से हटाकर किसी कार्यक्रम की स्वागत व्यवस्था में लगाया जाना उचित है?

यदि विद्यालय प्रबंधन के पास इसके लिए उचित अनुमति थी, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि अनुमति नहीं थी, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। क्योंकि स्वागत में खड़े बच्चों से ज्यादा जरूरी है यह जानना कि उन्हें वहां खड़ा किसने किया था।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *