बालोद। जिले की सड़कों पर बेलगाम दौड़ते भारी वाहन अब राहगीरों के साथ-साथ बेजुबान पशुओं के लिए भी काल बनते जा रहे हैं। आए दिन तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हादसे सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा रविवार को बालोद शहर के पर्यावरण पार्क के आगे बेदराकोन्हा मार्ग पर सामने आया, जहां एक तेज रफ्तार वाहन ने सड़क पर मौजूद 8 गौवंशों को रौंद दिया। हादसा इतना भीषण था कि सभी गौवंशों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद सड़क पर गौवंशों के शव बिखरे देख क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल निर्मित हो गया। स्थानीय लोगों ने भारी वाहनों की रफ्तार और वाहन चालकों की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से माइंस से कच्चा लोहा लेकर गुजरने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं।
आखिर कब थमेगी बेलगाम रफ्तार?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। कई वाहन चालक गति सीमा और सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी करते नजर आते हैं। ऐसे में सड़क पर चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और मवेशियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
हादसे के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी बड़े मानवीय हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेंगे? यदि भारी वाहनों की रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में इससे भी गंभीर दुर्घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौ सेवकों और पुलिस ने संभाली जिम्मेदारी
हादसे की जानकारी मिलने के बाद गौ सेवक अजय यादव, राकेश साहू,प्रेस रिपोर्टर क्लब बालोद के अध्यक्ष तरुण नाथ योगी, बालोद पुलिस से स. उपनि. गौकरण भंडारी, आरक्षक मनीष राजपूत एवं नगरपालिका से पूर्णानंद आर्य की टीम मौके पर पहुंची। सभी के सहयोग से मृत गौवंशों को सड़क से हटाकर विधिवत एवं सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
इस मानवीय पहल से जहां मृत गौवंशों को सम्मान मिला, वहीं हादसे के बाद सड़क पर उत्पन्न स्थिति को भी नियंत्रित किया गया।
भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण की मांग
घटना ने एक बार फिर जिले में भारी वाहनों की निगरानी और यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन एवं यातायात विभाग से मांग की है कि माइंस क्षेत्र से आने-जाने वाले भारी वाहनों की गति पर प्रभावी नियंत्रण, नियमित जांच और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
आठ बेजुबानों की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस हादसे से सबक लेते हैं या अगली दुर्घटना का इंतजार करते हैं।

