रायपुर, 25 जुलाई, 2026: मैट्स लॉ स्कूल, मैट्स विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा “कानून, प्रौद्योगिकी एवं नैतिकता के अंतर्संबंध की खोज” विषय पर एक विशेष ऑनलाइन आमंत्रित व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का विशेष विषय था “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा सृजित कृतियों के विधिक आयाम: कॉपीराइट स्वामित्व, नैतिक अधिकार एवं शैक्षणिक ईमानदारी”। यह कार्यक्रम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में उभरती विधिक चुनौतियों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करने तथा उत्कृष्ट विधि शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. उपंकर चुटिया, एसोसिएट प्रोफेसर एवं पीएच.डी. समन्वयक, स्कूल ऑफ लॉ, दयानंद सागर विश्वविद्यालय, बेंगलुरु थे। अपने व्याख्यान में उन्होंने जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तीव्र विकास से उत्पन्न हो रहे विधिक प्रश्नों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एआई द्वारा निर्मित सामग्री पारंपरिक बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) कानून की अवधारणाओं को चुनौती दे रही है तथा कॉपीराइट स्वामित्व से जुड़े जटिल प्रश्नों पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी चर्चा की कि ऐसी परिस्थितियों में लेखकीय अधिकार मानव उपयोगकर्ता, सॉफ्टवेयर डेवलपर अथवा स्वयं एआई प्रणाली में से किसे प्राप्त होने चाहिए।
डॉ. चुटिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में नैतिक अधिकारों (Moral Rights) के महत्व पर विशेष बल देते हुए रचनात्मक कृतियों में श्रेय (Attribution), मौलिकता तथा सृजनात्मक अखंडता की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया। एआई के नैतिक पक्षों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में ईमानदारी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।” उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि एआई आधारित तकनीकों का उपयोग करते समय पारदर्शिता, सत्यनिष्ठा तथा उत्तरदायित्व के उच्च मानकों का पालन करें।
व्याख्यान में शैक्षणिक ईमानदारी (Academic Integrity) से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. चुटिया ने विधिक अनुसंधान एवं अकादमिक लेखन में एआई के जिम्मेदार उपयोग पर बल देते हुए स्वचालित साहित्यिक चोरी (Automated Plagiarism), फर्जी संदर्भ (Fake Citations), शैक्षणिक कदाचार तथा कठोर शोध मानकों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को एआई को केवल विश्लेषणात्मक एवं सहायक उपकरण के रूप में उपयोग करने तथा स्वतंत्र विधिक चिंतन एवं आलोचनात्मक विश्लेषण का विकल्प न बनने देने की सलाह दी।
गूगल मीट के माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में विधि के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विधि व्यवसाय से जुड़े विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने कॉपीराइट उल्लंघन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए भविष्य के नियामक ढांचे, डीपफेक तकनीक तथा एआई शासन (AI Governance) जैसे समकालीन विषयों पर अपने प्रश्न रखे और सार्थक चर्चा की।
यह कार्यक्रम डॉ. प्याली चटर्जी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, मैट्स लॉ स्कूल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उनके सतत प्रयासों से संस्थान में अंतर्विषयक विधिक शिक्षा तथा समकालीन कानूनी विमर्श को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है। इस आयोजन ने मैट्स लॉ स्कूल एवं दयानंद सागर विश्वविद्यालय की प्रौद्योगिकी, नैतिकता एवं नवाचार के क्षेत्र में विधिक अध्ययन को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ किया।
मैट्स लॉ स्कूल ने इस सफल आयोजन हेतु माननीय कुलाधिपति, माननीय कुलपति, कुलसचिव एवं विश्वविद्यालय प्रबंधन के सतत मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही, संस्थान ने डॉ. उपंकर चुटिया के प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने अपने ज्ञान एवं अनुभव से प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कानून के निरंतर विकसित होते संबंधों की गहन समझ प्रदान की।
कार्यक्रम का समापन सहायक प्राध्यापक सुश्री सुवर्णा गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने भविष्य के विधि विशेषज्ञों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव से उत्पन्न कानूनी एवं नैतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु ऐसे प्रभावशाली शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन की मैट्स लॉ स्कूल की निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः व्यक्त किया।

