रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत राजनांदगांव जिले के ग्राम देवादा में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण को लेकर किसानों ने बड़े घोटाले के आरोप लगाए हैं। शनिवार को गांव के किसान एसीबी रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने लिखित शिकायत देकर पटवारी, राजस्व अधिकारियों और बिल्डर लाबी पर मिलीभगत का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि मुआवजा बढ़ाने के नाम पर दो से तीन लाख रुपये मांगे गए। जिन्होंने रकम नहीं दी, उनकी जमीन को रिकार्ड में असिंचित और कम मूल्य वाली बताकर मुआवजा घटा दिया गया।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
शिकायत में दावा किया गया कि जिन खेतों में नहर और नाली से सिंचाई होती है, उन्हें कागजों में एक फसली और बंजर दर्शाया गया। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में कॉलोनी नहीं होने के बावजूद दस्तावेजों में विकसित कालोनी और सैकड़ों पेड़ दिखाकर मुआवजा सूची तैयार की गई। कुछ किसानों ने अधिग्रहण के बाद बची जमीन औने-पौने दाम में खरीदने दबाव बनाने और खसरा रिकार्ड में हेरफेर के आरोप भी लगाए हैं। किसानों ने पूरे मामले की न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
किसानों ने शिकायत में आरोप लगाया कि मुआवजा बढ़ाने के लिए पटवारी द्वारा दो से तीन लाख रुपये मांगे गए। शिकायत के अनुसार जिन्होंने रकम नहीं दी, उनकी जमीन का मूल्यांकन कम कर दिया गया। किसानों ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों ने पैसे देकर ज्यादा मुआवजा प्राप्त किया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की एसीबी और न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई खेतों में नहर और नाली से नियमित सिंचाई होती है। लेकिन राजस्व रिकार्ड में उन्हें असिंचित दर्शाया गया। किसानों के अनुसार इससे जमीन की कीमत कम तय हुई और मुआवजा घट गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वास्तविक खेती और फसल की स्थिति को जानबूझकर छिपाया गया। किसानों ने भूमि मूल्यांकन की दोबारा जांच की मांग की है।
खसरा सूची और भुगतान रिकार्ड में गड़बड़ी
श्याम लाल देवांगन और अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ खसरा नंबर अवॉर्ड सूची में नहीं थे। लेकिन मुआवजा सूची में उनके नाम पर भुगतान दर्शाया गया। वहीं कुछ ऐसी जमीनों का भी मुआवजा बनाया गया जो सड़क से प्रभावित ही नहीं थीं। किसानों ने इसे रिकार्ड में हेरफेर और संभावित फर्जी भुगतान का मामला बताते हुए दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
बिल्डर पर दबाव बनाकर जमीन खरीदने के आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण के बाद बची जमीन को औने-पौने दाम में खरीदने के लिए बिल्डर द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। महेश सिन्हा ने शिकायत में कहा कि निजी जमीन बचाने के लिए अधिग्रहण नक्शों में बदलाव किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमांकन और नक्शों में गड़बड़ी कर कुछ जमीनों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई। किसानों ने पूरे सीमांकन की तकनीकी जांच की मांग की है।
कागजों में कालोनी, पेड़ और फसलें बढ़ा दी
सुरेश चतुर्वेदी और भुवन लाल ठाकुर ने शिकायत में कहा कि गांव में न विकसित कालोनी है और न ही बड़ी संख्या में वृक्ष मौजूद हैं। लेकिन मुआवजा रिकार्ड में ऐसी जानकारी दर्ज की गई। किसानों का आरोप है कि खेतों की वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज तैयार कर मुआवजा निर्धारण किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि गलत रिकार्ड बनाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

