CG HIGH COURT: बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एक गंभीर बीमारी से जूझ रही शिक्षिका के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्कूल शिक्षा सचिव को त्वरित निर्णय लेने का आदेश दिया है। अदालत ने शिक्षा सचिव को निर्देशित किया है कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर तीन सप्ताह के भीतर विचार कर समुचित निर्णय लें। इस निर्देश के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को निराकृत कर दिया है। यह संवेदनशील मामला शासकीय प्राथमिक शाला कुधारापानी (विकासखंड सीतापुर, जिला सरगुजा) में पदस्थ शिक्षिका किरण साहू का है। किरण बड़ी आंत और मलाशय के बीच (कोलोरेक्टल) तीसरे चरण के कैंसर से पीड़ित हैं। वर्तमान में उनका इलाज बालको कैंसर हॉस्पिटल, नया रायपुर में चल रहा है, जहां अब तक उनकी पांच बार कीमोथेरेपी हो चुकी है। गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्होंने एडवोकेट रामचरण साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका में बताया गया कि 5 मई 2026 को आवेदिका को छठवीं बार कीमो के लिए बालको हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों और सर्जनों के अनुसार, याचिकाकर्ता को 28 रेडिएशन कीमो से गुजरना होगा। इसके बाद रेक्टम सिग्मायड सर्जरी, स्टोमा बैग की रिवर्स सर्जरी और दो साल बाद कीमो पोर्ट की सर्जरी होनी है। चिकित्सकों ने स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता को ज्यादा सफर न करने की सख्त हिदायत दी है और उन्हें परिवार की देखरेख में रहने की सलाह दी है। सरगुजा से रायपुर इलाज के लिए लंबा सफर करना उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिम भरा है।
महासमुंद तबादले से इलाज में मिलेगी मदद
शिक्षिका की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यदि उनका तबादला सरगुजा से उनके निज निवास स्थान महासमुंद कर दिया जाता है, तो उन्हें इलाज कराने में काफी सुविधा होगी। महासमुंद से नया रायपुर स्थित बालको अस्पताल आना-जाना आसान होगा और परिवार का साथ मिलने से उनकी देखरेख भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता को स्कूल शिक्षा सचिव के समक्ष अपना नया अभ्यावेदन पेश करने को कहा है, जिस पर विभाग को तीन सप्ताह के भीतर संवेदनशीलता से फैसला लेना होगा।

