RBI New Rules 2026: मुंबई। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि बैंक पर्सनल, कार या होम लोन की रिकवरी के लिए डिफॉल्टर के मोबाइल फोन को डिसेबल या प्रतिबंधित नहीं कर सकते हैं। हालांकि, बैंकों को उस मोबाइल डिवाइस को प्रतिबंधित या डिसेबल करने की अनुमति होगी, जिसे बैंक ने स्वयं फाइनेंस किया है।
केंद्रीय बैंक इन नियमों को 1 अक्टूबर, 2026 से लागू करने का प्रस्ताव कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने लोन की बकाया राशि की रिकवरी और रिकवरी एजेंसियों को काम पर रखने के मामलों से जुड़े सख्त नियम प्रस्तावित किए है। ये नियम उधारकर्ताओं के उत्पीड़न की शिकायतों के बीच लाए गए हैं, जिसमें इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के जरिये उत्पीड़न और गाली-गलौज का इस्तेमाल शामिल है।
आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है, कोई भी बैंक ऐसा कोई तकनीक आधारित तरीका नहीं अपनाएगा, जो किसी उधारकर्ता के मोबाइल डिवाइस की कार्यक्षमता को प्रभावित करे। बैंक ऐसा तभी कर सकेंगे जब उसे डिवाइस के फाइनेंस से जुड़े लोन की बकाया राशि की रिकवरी करनी हो। इस मामले में भी बैंक तब तक डिवाइस को ब्लॉक नहीं कर सकेंगे जब तक कि संबंधित लोन 90 दिनों से ज्यादा समय से बकाया नहीं हो गया हो।
आरबीआई ने कहा कि गलत तरीके से प्रतिबंध लगाने या उसे हटाने में देरी होने पर बैंक को उधारकर्ता को उस समय तक 250 रुपये प्रति घंटे की दर से मुआवजा देना होगा, जब तक कि उस गलत कार्रवाई को ठीक नहीं कर दिया जाता है।
केंद्रीय बैंक ने लोन की रिकवरी और रिकवरी एजेंटों को काम पर रखने के मामलों में भी संशोधित मसौदा निर्देश जारी किए हैं। आरबीआई ने कहा है कि बैंकों को अपने कर्मचारी/रिकवरी एजेंट द्वारा लोन की बकाया राशि की रिकवरी के लिए उधारकर्ता/गारंटर को की गई काल का समय और संख्या रिकार्ड करनी चाहिए।

