Coal Levy Scam: रायपुर। अवैध कोल लेवी वसूली मामले में ACB-EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी नारायण साहू के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में 5वां पूरक अभियोग पत्र प्रस्तुत किया है। यह चालान लगभग 1000 पन्नों का है। बता दें कि आरोपी नारायण साहू कारोबारी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर था।
जानकारी के अनुसार, अपराध क्रमांक 03/2024 में 20 मई 2026 को आरोपी नारायण साहू के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 384, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 7ए एवं 12 के तहत विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। इस मामले में अब तक एक मूल और पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं। आरोपी वर्तमान में रायपुर केंद्रीय जेल में बंद है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी नारायण साहू अवैध कोल लेवी वसूली रकम के सिंडिकेट का एक सक्रिय सदस्य था, जो सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर अवैध कोल लेवी वसूली के कार्य में कोल व्यापारियों और कोल परिवहनकर्ताओं से अवैध नगदी रकम एकत्रित कर उसे रजनीकांत तिवारी के पास जमा करता था। अवैध कोल लेवी वसूली रकम में से लगभग 7.5 करोड़ रुपये की नगदी राशि सौम्या चौरसिया, समीर विश्नोई एवं अन्य को हस्तांतरण, परिवहन एवं प्रबंधन किया जाना पाया गया।
प्रकरण में पूर्व में प्रस्तुत अभियोग पत्र में अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध अतिरिक्त साक्ष्य भी जोड़े गए हैं। वहीं इस मामले में संभावित अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।
ED ने इन मामलों के आधार पर शुरू की जांच
ED ने यह जांच बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर क्रमांक 129/2022, आयकर विभाग की अभियोजन शिकायत क्रमांक 3167/2023 (दिनांक 19 जून 2023) तथा EOW/ACB रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में कोयला लेवी की अवैध वसूली को लेकर दर्ज एफआईआर क्रमांक 03/2024 (दिनांक 11 जनवरी 2024) के आधार पर शुरू की थी।
540 करोड़ की अवैध वसूली का खुलासा
जांच में पता चला है कि कुछ निजी व्यक्तियों के एक समूह ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से, जुलाई 2020 से जून 2022 की अवधि के दौरान ट्रांसपोर्ट किए गए कोयले के प्रति टन 25 रुपये की दर से कोयला ट्रांसपोर्टरों से पैसे वसूलने के लिए एक रैकेट बनाया था। इस अवधि के दौरान, सिंडिकेट द्वारा लगभग 540 करोड़ रुपये अवैध रूप से वसूले गए। जबरन वसूली गई नकदी, जो अपराध की कमाई (POC) थी, का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने, चुनाव से संबंधित खर्चों को फंड करने और चल और अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए किया गया था। अब तक, आरोपी व्यक्तियों से संबंधित 273 करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान की गई है और उन्हें अटैच किया गया है।
जांच के दौरान ईडी ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 35 आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ पांच अभियोजन शिकायतें विशेष न्यायालय(PMLA) के समक्ष दायर की गई हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

