क्राइम वॉच

12 लाख की चोरी कोर्ट के बाहर ही समझौते की बातचीत, अमानक स्तर का आभूषण खप रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में।

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12 लाख की चोरी कोर्ट के बाहर ही समझौते की बातचीत, अमानक स्तर का आभूषण खप रहा है ग्रामीण क्षेत्रों में 

बिलासपुर/ मस्तूरी /अमित खुटे -बिलासपुर।बीते सप्ताह 5 अप्रैल को पचपेड़ी थाना की एक सफलता इतनी बड़ी थी कि बिलासपुर पुलिस अधीक्षक ने पत्रकार वार्ता करते हुए मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि फेरी लगाकर सोने चांदी का आभूषण बेचने वाला शंकर साहू की शिकायत पर मामला कायम हुआ और 379 के तहत रूपचंद राय और उसके चचेरे भाई विजय सूर्यवंशी को 12 लाख के माल के साथ पकड़ा। खुलासे के बाद दोनों आरोपियों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब परत दर परत मामले को समझें। रूपचंद राय गोडाडीह गांव का पोर्टल पत्रकार है जिस पर भया दोहन, आरटीआई की आड़ में सरपंचों की शिकायत और फिर पैसा वसूली के कई आरोप हैं, के घर पर शंकर साहू आभूषण दिखाने गया था और वहीं पर उसका सोने से भरा एक डिब्बा छूट गया जिसे आरोपी के घर वालों ने रख लिया नियत बदल गई थी इसलिए सोने के आभूषण रूपचंद राय के ससुराल में छुपा दिया गया। जिसने यह काम किया उसे आरोपी नहीं बनाया गया। सोने के जेवरात पत्रकार वार्ता में दिखाए गए थे उनमें से एक भी जेवरात मानक स्तर का नहीं है जबकि सरकार 2021 से हाल मार्क ज्वेलरी ही बेचने की अनुमति देती है सीधा सा अर्थ है कि बिलासपुर में सराफा व्यवसाई अमानक स्तर के जेवरात फेरी वालों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में खपा रहे हैं। जिस ज्वेलरी हाउस से शंकर साहू ने बिल प्राप्त किया वह जीएसटी बिल है और उसमें दर्ज किए गए जेवर का वजन का विवरण अलग से नहीं लिखा है कुल जेवर का एक वजन अंत में लिखा है 200 ग्राम कीमत दर्ज है। सूत्र बताते हैं कि सराफा का यह एक दुकानदार कम से कम एक दर्जन फेरी वालों को माल देता है। आप स्वयं ही अंदाज लगाएं कि बिलासपुर सराफा के और कितने दुकानदार इसी तरह फेरी वालों के माध्यम से अमानक स्तर का आभूषण ग्रामीण उपभोक्ता को खपा रहे हैं। इनमें से कितने उपभोक्ता उधार में ली गई ज्वेलरी का बिल रखते होंगे। ऐसा पता चला है कि 12 लाख की चोरी का प्रार्थी अभियुक्त के पिता के दबाव में न्यायालय में समझौता करने को तैयार हैं। जब की धारा 379 समझौता योग्य है पर उसमें उसमें यह भी जुड़ा है कि जप्त की गई वस्तु का बाजार कीमत ₹2000 से अधिक का नहीं होना चाहिए पर यहां पर जप्त किया गया अमानक स्तर का आभूषण 12 लाख रुपए की कीमत का बताया जा रहा है ऐसे में पूरा मामला संदिग्ध जान पड़ता है। विगत 2 दिनों से पचपेड़ी थाने की एफआईआर ऑनलाइन सेंसिटिव, संवेदनशील टाइटल के साथ दिखाई नहीं पड़ती। कारण यह बताया जाता है कि जैसे ही चोरी का माल एक लाख से अधिक कीमत का होता है उसे संवेदनशील माना जाता है।

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