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दिव्यांगों का दर्द: सरकार कि सुविधाएं सिर्फ कागजों पर, आंखों और पैरों से दिव्यांग गरीबों का गुजारा भी मुश्किल, सरकार प्रशासन से मांग रहे मदद

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  • दिव्यांग जनों को अगर सहानुभूति के साथ सहयोग भी मिल जाए तो उनके जीवन के अंधकार में कुछ उजाला जरूर आ सकता है।

आफताब आलम/बलरामपुर : बलरामपुर जिला के वाड्रफनगर ब्लाक अंतर्गत निर्मल ग्राम पंचायत सरना का है जहां एक घर में दो व्यक्ति है जिसमें एक मुरलीश्याम जन्म से ही पैरों से दिव्यांग हैं तथा दूसरा रामसजीवन जिसे जन्म से दिखाई नहीं देता है दोनों रिश्ते में चाचा भतीजा लगते हैं लेकिन शासन प्रशासन से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित है गांव के सरपंच सचिव एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई मदद नहीं मिली। वहीं जिला प्रशासन तो बड़े-बड़े दावे करते नजर आती है और हमारे भारतीय संविधान में भी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न जाने कितने गाइडलाइन बने हुए हैं लेकिन उनमें ज्यादातर सुविधाएं कागजों में ही होती है। आने जाने में पैर से लाचार हैं दोनों दिव्यांग। दिव्यांगता का दंश झेलते हुए कहीं आने जाने में भी बेबस और लाचार हैं इसके बावजूद पानी लेने के लिए यह दोनों जोड़ी स्वयं ही कुएं तक जाते हैं क्योंकि इनके लिए पानी कि भी कोई सुविधा नहीं है जब हमारे रिपोर्टर आफताब आलम ने इनसे शासन से मिलने वाली सुविधाओं के सम्बंध में बात की तो बताया कि दिव्यांगता पेंशन के नाम पर इन्हें महिने में 350 रुपए मिलते हैं इन्हें आवागमन में मदद के लिए मोटराइज्ड ट्राई साइकिल कि जरूरत है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस खबर के प्रकाशित होने के बाद क्या इन्हें कुछ सुविधा जिला प्रशासन की ओर से प्राप्त होती है या फिर दिव्यांगों के लिए बनाई योजनाएं सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह जाती है।

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