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रोप-वे में हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों की याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, चालू करनें रास्ता साफ

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तिलकराम मंडावी/डोंगरगढ़ : रोप-वे में हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर संचालन पर रोक लगा रखी थी। विपक्षियों ने हवाला दिया था कि बिना टेक्निकल टीम के रोप-वे का संचालन किया जा रहा था इसलिए हादसा हुआ। 2 अगस्त को हाईकोर्ट में मामलें की सुनवाई हुई। रोप-वे संचालन के लिए अनुमति मिल गई है। एक-दो दिनों में ट्रायल के बाद आम दर्षनार्थियों के लिए रोप-वे खुल जाएगा। बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद मां बम्लेष्वरी का दरबार कोरोना प्रोटोकॉल के साथ दर्षनार्थियों के लिए खुल चुका है। लेकिन रोप-वे की सुविधा से फिलहाल वंचित है। वहीं दूसरी तरफ नगर पालिका का रोप-वे भी कोरोना की पहली लहर के समय से बंद पड़ा हुआ है। जिसे फिर से चालू करानें के लिए मषक्कत षुरू हो गई है। लेकिन टेंडर में राजनीतिकरण होनें से पहलें ही विवादित हो चुका है। लेकिन मंदिर ट्रस्ट के रोप-वे का संचालन षुरू होनें से दर्षनार्थियों को आवाजाही में बड़ी राहत मिलेगी। मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष नारायण अग्रवाल ने बताया कि हाईकोर्ट से आदेष मिलनें के बाद रोप-वे का ट्रायल कर दर्षनार्थियों के लिए चालू किया जाएगा।

जानिए, ट्रस्ट व पालिका के रोप-वे संचालन में क्या-क्या दिक्कतें
नगर पालिकाः कोरोना की पहली लहर के बीच ही नगर पालिका व रोप-वे कंपनी के बीच संचालन का एग्रीमेंट खत्म हुआ। स्थिति सामान्य हुई तो पालिका ने दोबारा टेंडर मंगाया। सत्ता से जुड़े लोगों ने संचालन करनें के लिए उठापटक की। लेकिन विवादों व राजनीतिक कारणों से बात नहीं बनी। बता दें कि रोप-वे संचालन के लिए अनुभव, टेक्निकल टीम का होना आवष्यक है। लेकिन दुर्ग के ठेकेदार के पास रोप-वे संचालन का अनुभव नहीं होनें व टेक्निकल टीम नहीं होनें के बावजूद टेंडर डाला गया था। जिससें कई पार्शदों ने आपत्ति भी की थी।

मंदिर ट्रस्टः मां बम्लेष्वरी मंदिर ट्रस्ट समिति के नए रोप- वे का संचालन कब से षुरू होगा इसे लेकर संषय बना हुआ है। क्योंकि हादसें के बाद विपक्षी ट्रस्टियों ने कोर्ट से रोक लगा दिया है। विपक्ष के रोक के बाद सत्ताधारी पदाधिकारी टेक्निकल टीम की जानकारी कोर्ट में पेष करनें जा रहे है। अध्यक्ष नारायण अग्रवाल का कहना है कि संचालन निर्माण करनें वाली कंपनी ही कर रही थी। हम तो केवल मॉनीटरिंग कर रहे थे। इसलिए कंपनी के पास टेक्निकल टीम का अनुभव है और इससे संबंधित दस्तावेज कोर्ट में जमा कर दिया गया है।

रोप-वे बंद होनें से पालिका की आय में सीधा प्रभाव- सालों से नगर पालिका के राजस्व को मजबूत करनें में रोप-वे की आय का प्रमुख योगदान रहा है। हर माह कर्मचारियों को वेतन देनें में पालिका को मदद मिलती थी। कोरोनाकाल से बंद होनें के चलतें कई महीनों तक कर्मचारियों को वेतन देनें के लाले पड़े। नगर पालिका को हर माह लाखों रूपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लेकिन इस ओर अब तक पहल नहीं की गई है। नगर पालिका ने दोबारा टेंडर नहीं मंगाया है।

अभी सीढ़ी से जा रहे दर्षनार्थी, दिव्यांगों व बुजुर्ग नहीं जा पा रहे

रोप-वे बंद होनें की वजह से दर्षनार्थियों को पैदल सीढ़ी के रास्तें उपर मंदिर जाना पड़ रहा है। जबकि दिव्यांग व बुजुर्ग पैदल नहीं जा पा रहे है। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार 2 अगस्त को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इसके बाद ही नए रोप-वे के दोबारा षुरू होनें की स्थिति साफ होगी। विपक्षी ट्रस्टियों के आरोप के मुताबिक ट्रस्ट समिति को टेक्निकल टीम के साथ संचालन करना है। गुड्स ट्रॉली टूटनें के बाद चार पदाधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस डोंगरगढ़ थाना में दर्ज हुआ है।

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