
* कई असाध्य रोगों को जड़ से दूर करने में भी पूर्णतः कारगर है,शराब की नशा मुक्ति के लिए रामबाण सफेद और श्याम रंग के पौधे होते है |
नवागढ़ ब्यूरो (संजय महिलांग ) | नवागढ़ के युवा किसान किशोर राजपूत विश्व के दुर्लभ एवं अद्वितीय दहिमन वृक्ष का संरक्षण संवर्धन करने के लिए लोगों को स्वेत और श्याम वर्ण के बीज निःशुल्क दे रहे हैं।
विश्व प्रसिद्ध एंटी बायोटिक,एंटी फंगल,एंटी वायरस,एंटी अल्कोहल,एंटी पाइजन पौधा “दहिमन” का होता हैं जो कि प्रकृति का संपूर्ण जीव जगत के लिए अनुपम वरदान है।परंतु दुर्भाग्य से आज स्वयं के अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।लोगों की अज्ञानता,मुर्खता व स्वार्थ लोलुपता के कारण यह मृत संजीवनी तुल्य पौधा आज धरती से विलुप्त होने के कगार पर है।
* दहिमन की विशेषताएँ और विलुप्तिकरण के प्रमुख कारण
👉 इसके पत्ती,तना,लकडी़, फूल,फल,जड़,यहाँ तक कि इसके नीचे की मिट्टी भी सभी औषधिय गुणों से युक्त होते हैं।जिसके कारण इसका अंधाधुंध कटाई किया गया। नीम हकीमों के बहकावे में आकर भी लोग इसे काटते रहे।
👉-यदि कहीं पर हजारों लीटर भी महुआ शराब रखे हों और उसके आसपास दहिमन की छोटी सी लकडी़ अथवा पत्ती पडी़ हो तो सारा शराब पानी बन जाता है।इसके छाया मात्र से भी यदि शराबी गुजर जाए तो उसका नशा उतर जाता है।जिसके कारण शराब बनाने व बेचने वालों ने भी इसकी खूब कटाई कराई।
👉-इसके औषधिय गुणों को मनुष्यों से बेहतर जानवर जानते हैं।यदि किसी जंगली जानवर सुअर,हिरण आदि को शिकारी का विषैला तीर अथवा गोली लगी हो और आसपास दहिमन पौधा हो। तो वह जानवर सीधे उस पौधे के पास जाता है और पौधे से चिपककर अपना विष दूर कर लेता है।परिणाम स्वरूप शिकारियों ने भी दहिमन पौधे से अपनी दुश्मनी निकाली।
👉-दहिमन की कुछ पत्तिया चबाकर शक्कर खाने पर शक्कर स्वादहीन लगता है।
👉-दहिमन के पत्तियों पर लकडी़ आदि से कुछ भी लिखने पर बिल्कुल पेन की तरह लिखाई होता है।प्राचीन काल में ये पत्तियाँ संदेश प्रेषण के अच्छे साधन थे।कालांतर में ये ही पत्तियाँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वनवासी आंदोलन कारियों द्वारा संदेश प्रेषण हेतू प्रयोग किए जाने लगे।जिसे विफल करने के लिए अंग्रेजों ने भी अंधाधुंध दहिमन कटवाए।
👉-स्वतंत्रता संग्राम में घायल भारतीय सेनानियों द्वारा दहिमन उपचार से स्वास्थ्य लाभ लेने के कारण भी अंग्रेजों ने इस दुर्लभ वनस्पति का समूल नाश किया।
👉/-अज्ञानता व अंधविश्वास के कारण यथा दहिमन लकडी़ का लाठी बनाना,कृषि उपकरण हल,जुआडी़ बनाना आदि के कारण भी दहिमन विलुप्त होने के कगार पर है!
* दहिमन वृक्ष की पहचान
दहिमन वृक्ष की सबसे बड़ी पहचान यह है कि अगर इसके पत्ते पर नुकीली चीज से कुछ लिखा जाये तो वह अपने आप उभरकर सामने आ जाता है| यह एक मध्यम आकार का वृक्ष है, जिसे आदिवासियों द्वारा पनकी / दही पलाश, दाई वास, तेजसागुन, शिकारी के नाम से जाना जाता है। दहिमन के दुर्लभ होने का कारण “दहिमन” या “देहिपलस” में फेनोल्स, टेरानोइड्स, सैपोनिन्स, वाष्पशील तेल, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स सहित विभिन्न बायोएक्टिव यौगिक तत्व शामिल है जो कई औषधीय उपयोग में आता है।
* दहिमन के औषधीय गुणधर्म
• इस वृक्ष की छाल व पत्तियों का प्रयोग कैंसर के इलाज में लिया जाता है क्योंकि दहिमन की छाल में एथॉनलिक एक्सट्रैक्ट पाया जाता है जो बैक्टीरिया व फंफूद को रोकता है| जो कि एक प्रकार का एंटी कैंसर तत्व होता है|
• घाव हो जाने पर इसकी पत्तों को पीसकर लेप लगाने से घाव जल्द सुख जाता है|
• अगर चोट लगने पर अधिक खून बह रहा हो तो इसके पत्तों का लेप बनाकर लगाने से खून बहना बंद हो जाता है|
• लीवर में सूजन होने पर इसकी छाल का चूर्ण बनाकर उसका सेवन करे तो सूजन कम हो जाएगी|
• पीलिया होने पर इसकी छाल के चूर्ण का सेवन प्रतिदिन करे तो पीलिया में आराम मिलेगा क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और पीलिया गर्मी बढ़ने के कारण होता है|
• अगर आप मोटापे से ग्रस्त है तो इसके पत्तों का चूर्ण लेकर उसमे नीबूं मिलाकर एक माह तक सेवन करे तो मोटापा कम हो जाएगा|
• मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति अगर इसके पत्ते का चूर्ण बनाकर उसका सेवन करे तो मानसिक रोग ठीक हो जाता है|
• जिन्हें ब्लडप्रेशर है अगर में इसकी पत्तियों के चूर्ण का सेवन करे तो आराम मिलेगा|
• जो लोग शराब की लत से परेशान है वे अगर इसके पत्तों के रस का सेवन कुछ समय तक करे तो उनकी यह लत छुट जाती है|
• इसकी पत्तियों का रस सर्पदंश व नशा भी उतार सकता है|
* दहिमन के वृक्ष से जुड़ी मान्यताएं
छत्तीसगढ़ के लोगों कि दहिमन के वृक्ष से जुड़ी बहुत सारी मान्यताएं भी है जैसे:–
• लोगों का मानना है कि दहिमन की लकड़ी को अपने पास रखने से सांप पास में नहीं आता है|
• मान्यता है कि जिस घर में शराब बन रही है उस जगह पर अगर इसके पेड़ की डंगाल रख दी जाए तो शराब नहीं पकती है|
• मान्यता तो यह भी है कि अगर इसके पेड़ के नीचे बैठकर शराब पी जाये तो नशा नहीं होता है|
• मान्यता है कि अगर इसके पेड़ की छांव में बैठा जाये तो सारा तनाव दूर हो जाता है|
वैज्ञानिकों द्वारा दहिमन को लेकर रिसर्च चल रही है कि यह ओर किन-किन बीमारियों के इलाज के लिए उपयोग में लाया जा सकता है|
दहिमन पेड़ का बीज
*पेड़ नही प्राण लगाबो अभियान के संयोजक पवन कुमार जायसवाल और मदन मोहन वैष्णव लोरमी से मिला है।
