संतोष ठाकुर/तखतपुर l भगवान परशुराम की जयंती आज 14 मई को विप्र जनों ने अपने अपने घरों में मनाया ।कोरोना संक्रमण के कारण पिछले एक माह से लगे लॉकडाउन के कारण किसी तरह का कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं हुआ। किंतु घरों में ही पूजा अर्चना किये।आर्यावर्त ब्राम्हण महासभा के जिला मीडिया प्रभारी पंडित जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि विप्र जनों ने सुबह से ही अपने अपने घरों में भगवान परशुराम जी की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना किये।कोरोना काल के कारण परशुराम जी की जयंती पर कोई समारोह नहीं हुआ है।इस विषम परिस्थितियों को देखते हुए अपने अपने घरों में ही पूजा कर जयंती मनाए। शाम को अपने घर में दीपक भी जलाए गए।
परशुराम जयंती 14 मई शुक्रवार को मनाई गई। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जी की जयंती बड़ी धूम-धाम के साथ मनायी जाती है।लेकिन कोरोना के कारण इस बार आयोजन नहीं हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम जगत के पालनहार विष्णुजी के अवतार हैं। इस दिन विधि-विधान से भगवान परशुराम जी की पूजा की जाती है।वहीं अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं।इस दिन घड़े में जल दान देने की भी परम्परा है।प्रतिवर्ष बच्चे गुड्डे गुड़िया का विवाह भी रचाते हैं पर इस बार नहीं हो पाया।
भगवान परशुराम की जयंती विप्र जनों ने अपने अपने घरों में मनाया, पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामनाएं

