बिलासपुर। इलाज के बिल भुगतान को लेकर एक आदिवासी महिला का शव रोके जाने (बंधक बनाने) के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हरिओम सुपरस्पेशलिटी अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और तीन दिन के भीतर इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
ज्ञात हो कि हाल ही में हरिओम सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में यह अमानवीय मामला सामने आया था, जहां बिल का भुगतान नहीं होने के कारण प्रबंधन द्वारा आदिवासी महिला का शव उसके परिजनों को नहीं सौंपा जा रहा था। इस घटना के प्रकाश में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने इसे बेहद गंभीर माना और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू कर दी, जिसके तहत यह नोटिस जारी किया गया है।
इस घटना के बाद सीएमएचओ ने जिले के सभी निजी अस्पतालों के लिए भी सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। विभाग द्वारा हिदायत दी गई है कि किसी भी परिस्थिति में मरीज के शव को बंधक नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही, सभी निजी अस्पतालों को मेडिको-लीगल (एमएलसी) मामलों की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को देना अनिवार्य किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी निजी अस्पताल द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई को मरीजों व उनके परिजनों के अधिकारों की रक्षा करने और निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगाम कसते हुए उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

