भाजपा के एक प्रमुख पदाधिकारी का बेटा ठगी शिकार हो गया। मुंबई की कंपनी ने सोलर प्लांट लगाने के लिए 2 करोड़ रुपए ले लिए, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।
चूंकि पैसे के लेन देन का रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं था इसलिए काम शुरू नहीं हो पाया। भाजपा नेता ने कंपनी पर दबाव बनाने के लिए पुलिस में शिकायत की है, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं किया गया।
भाजपा नेता किसी तरह पुलिस के माध्यम से कंपनी पर राशि वापस लेने के लिए प्रयासरत हैं। एक डीसीपी इस काम में जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक इसमें सफलता नहीं मिली है। पुलिस अब इस मामले को किस तरह हैंडल करती है,यह देखना है।
साय सरकार के तीन साल, महीनेभर चलेगा अभियान
विष्णुदेव साय सरकार के तीन साल पूरे होने जा रहे हैं। इस मौके पर भाजपा ने सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए महीनेभर का अभियान चलाने की तैयारी की है। बिरसा मुंडा जयंती यानी 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम होंगे। इसकी शुरुआत राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में होगी। नवीन धरमजयगढ़ में आदिवासी सम्मेलन में शामिल होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनका यह पहला छत्तीसगढ़ प्रवास है। लिहाजा, उनके स्वागत के लिए पार्टी में जोरदार तैयारियां चल रही हैं। नवीन प्रदेश के नेताओं के साथ अलग से बैठक भी कर सकते हैं। ऐसे में उनके दौरे को लेकर संगठन में खासा उत्साह है। अब देखना है कि तीन साल की उपलब्धियों के प्रचार अभियान में पार्टी किस तरह की रणनीति अपनाती है।
कैबिनेट फेरबदल का हल्ला, फिलहाल कोई संभावना नहीं
पिछले कुछ समय से कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें खूब लगाई जा रही हैं। मगर फिलहाल इसमें कोई सच्चाई नजर नहीं आती। बताया जा रहा है कि फेरबदल को लेकर किसी भी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। जो कुछ होना है, वह नए साल में बजट सत्र निपटने के बाद ही होगा। फिलहाल पार्टी ने अगले दो महीने के लिए मंत्रियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। नगरीय निकायों के चुनाव संचालन की कमान भी मंत्रियों के हाथों में है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी और गजेन्द्र यादव को भिलाई-चरौदा नगर निगम की जिम्मेदारी मिली है, तो डिप्टी सीएम विजय शर्मा भिलाई और अरुण साव रिसाली नगर निगम का मोर्चा संभालेंगे। रायपुर के बीरगांव नगर निगम की कमान केदार कश्यप को सौंपी गई है। वैसे, बीरगांव में पंडरिया विधायक भावना बोहरा को सौरभ सिंह के प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। भावना भी जमकर प्रचार में जुटी हैं। चुनाव के नतीजे तो बाद में आएंगे, लेकिन फिलहाल मंत्रियों की जिम्मेदारियों ने फेरबदल की चर्चाओं पर विराम लगा दिया है।
घर में इज्जत का फालूदा बन रहा..
सरकार में आम लोगों की तो छोड़िए, भाजपा नेताओं की भी शिकायत है कि उनके काम नहीं हो रहे हैं। एक ऐसा ही मामला सामने आया, जिसमें पूर्व सांसद के नजदीकी रिश्तेदार के तबादले के लिए मुख्यमंत्री को दखल देना पड़ा था। पिछले दिनों प्रदेश भाजपा के एक पदाधिकारी मंत्रालय में एक वरिष्ठ अफसर के पास पहुंचे। अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि घर में उनकी इज्जत का फालूदा बन गया है। प्रदेश के पदाधिकारी होने के बावजूद परिवार के एक सदस्य का बस्तर तबादला नहीं रुकवा पा रहे हैं। दरअसल, तबादलों में संशोधन पर विचार के लिए मंत्रालय में कमेटी बनी हुई है और संबंधित अफसर उसके सदस्य हैं। लिहाजा, भाजपा नेता को उनसे काफी उम्मीदें थीं। मगर अफसर ने साफ कर दिया कि कमेटी के अधिकार सीमित हैं, इसलिए वे बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि, नेता की परेशानी देखकर मदद का भरोसा जरूर दिलाया। अब देखना है कि प्रदेश पदाधिकारी की घर में खोई इज्जत वापस लौटती है या नहीं!
पंचायत पदाधिकारी भी स्मृति ईरानी से मिलना चाहते हैं
प्रदेश भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी ने पिछले दिनों आधा दर्जन से अधिक बैठकें लेकर संगठन और सरकार के कामकाज का जायजा लिया। कैबिनेट, विधायक-सांसद, पूर्व विधायक-सांसद और निगम-मंडल के पदाधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई। मगर एक बड़ा वर्ग इन बैठकों से बाहर रह गया। यह वर्ग है पंचायत प्रतिनिधियों का। प्रदेश की करीब 90 फीसदी जिला और जनपद पंचायतों में भाजपा का कब्जा है, लेकिन वहां के पदाधिकारी खासे निराश बताए जा रहे हैं। उनकी शिकायत है कि फंड की कमी के चलते कामकाज प्रभावित हो रहा है और कहीं सुनवाई भी नहीं हो रही। पंचायत पदाधिकारी स्मृति ईरानी के सामने अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिल पाया। अब उनकी कोशिश किसी तरह प्रदेश प्रभारी से अलग बैठक तय कराने की है। एक पदाधिकारी ने तो यहां तक संकेत दिए हैं कि चुनावी साल में पंचायत प्रतिनिधियों के बीच भगदड़ मच सकती है। इसकी वजह यह है कि दल-बदल कानून उनके रास्ते में बाधा नहीं बनता। ऐसे में भाजपा के लिए पंचायतों में अपना कुनबा संभालना भी चुनौती बन सकता है।

