EC on VIP Voters: EC clarifies on VIP voter controversy, says SIR already
EC on VIP Voters नई दिल्ली। आंतरिक मतभेदों के आरोपों का सामना कर रहे चुनाव आयोग के सामने अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आयोग द्वारा बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल एप्लिकेशन के हालिया सॉफ्टवेयर अपडेट को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दरअसल, एप्पल एप स्टोर पर इस अपडेट के डिटेल्स में ‘वीआईपी मतदाताओं से जुड़े बदलावों को चिह्नित करें’ लिखा हुआ दिखाई दिया था।
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि बीएलओ को चिह्नित मतदाताओं को फ्लैग करने का निर्देश कोई नया नहीं है। यह एक स्टैन्डर्ड और नियमित प्रक्रिया है, जो आयोग द्वारा अप्रूव तीनों एसआईआर के आदेशों का हिस्सा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि अपने अधिकार क्षेत्र में प्रमुख और प्रतिष्ठित मतदाताओं को मार्क करने का निर्देश फील्ड अधिकारियों को काफी समय से दिया जाता रहा है। यह प्रक्रिया एसआईआर की व्यवस्था शुरू होने से बहुत पहले से चल रही है।
वीआईपी नहीं, प्रमुख मतदाता है आधिकारिक शब्द
आयोग के सूत्रों ने उदाहरण देते हुए बताया कि 29 मई 2023 को जारी एसएसआर आदेश के पैरा 20 में भी ऐसे निर्देश दिए गए थे। उसमें स्पष्ट लिखा था कि सांसद, विधायक, एमएलसी, संवैधानिक या घोषित पदों पर बैठे लोग, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, न्यायपालिका और लोक सेवाओं से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के नामों को चिह्नित किया जाए। साथ ही, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि इन प्रमुख हस्तियों के नाम प्रस्तावित मतदाता सूची में मौजूद रहें।
यही निर्देश 24 जून 2025 को बिहार के एसआईआर आदेश तथा इसके दूसरे और तीसरे चरण के आदेशों में भी दोहराया गया था। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक आदेशों में कहीं भी VIP शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
यह शब्द गलती से जुड़ा
उन्होंने कहा कि यह शब्द गलती से ऐप स्टोर के विवरण में शामिल हो गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अपडेट का उद्देश्य केवल इतना है कि यदि इन प्रमुख व्यक्तियों को कोई नोटिस दिया जाए या वे कोई प्रमाण पेश करें, तो उसे ऐप पर बिना किसी देरी के अपलोड किया जा सके।

