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नृत्य की साधना से विश्व पटल तक पहुंची सारंगढ़ की आर्या नंदे, अब ‘सेवा संकल्प अभियान’ में जनभागीदारी का दे रहीं संदेश

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Arya Nande from Sarangarh, who rose to global prominence through her dedication to dance, is now championing public participation in the ‘Seva Sankalp Abhiyan’.

सारंगढ़–बिलाईगढ़ / छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और साहित्य की समृद्ध नगरी सारंगढ़ की मूल निवासी एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओडिशी नृत्यांगना सुश्री आर्या नंदे ने अपनी दो दशकों की अनवरत कला-साधना से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। देश-विदेश में ओडिशी नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की छटा बिखेरने वाली आर्या नंदे अब ‘सेवा संकल्प अभियान’ से भी सक्रिय रूप से जुड़कर कला, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से आमजनों को सकारात्मक कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अभियान के तहत आयोजित सांस्कृतिक, सामाजिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों में सहभागिता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सेवा और संस्कृति दोनों समाज को जोड़ने की शक्ति रखते हैं और जब आमजन अपनी भूमिका निभाते हुए किसी सकारात्मक संकल्प से जुड़ते हैं, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। हाल ही में उन्हें कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘19वें गुरु देवप्रसाद युवा प्रतिभा सम्मान-2025’ से सम्मानित किया गया है।

 

सारंगढ़ से जुड़ी आर्या नंदे ने ओडिशी नृत्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए लगभग दो दशकों तक निरंतर साधना, रियाज और गुरु-शिष्य परंपरा का अनुसरण किया है। बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए माता श्रीमती विनीता नंदे और पिता श्री रवीन्द्र नंदे ने उन्हें विधिवत प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया। इसके बाद भुवनेश्वर स्थित प्रतिष्ठित ‘त्रिधारा ओडिशी डांस अकादमी’ में उन्होंने प्रख्यात नृत्य गुरु डॉ. गजेंद्र कुमार पंडा के मार्गदर्शन में ओडिशी नृत्य की बारीकियां सीखीं। गुरु के सानिध्य में निरंतर अभ्यास और अनुशासित साधना ने उनकी कला को निखारा और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया।

आर्या नंदे की कला-साधना का विस्तार देश की सीमाओं से आगे तक हुआ है। कम उम्र में ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। मलेशिया में गवर्नर द्वारा सम्मानित किए जाने के साथ उन्होंने कुआलालंपुर, जापान के टोक्यो, नागोया और कारिया में आयोजित ‘नमस्ते इंडिया’ कार्यक्रमों, सिंगापुर, बहरीन, दुबई, बैंकॉक, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ओडिशी नृत्य की प्रस्तुतियां दी हैं। इन मंचों पर उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य, परंपरा और संस्कृति की विविधता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिला।

राष्ट्रीय स्तर पर भी सुश्री आर्या नंदे ने अनेक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। खजुराहो डांस फेस्टिवल, चक्रधर समारोह रायगढ़, राजिम कुंभ फेस्टिवल, भोरमदेव महोत्सव, पावस-प्रसंग रायपुर, जांज्वल्य महोत्सव, रामगढ़ महोत्सव और 75वें सफर मुक्ताकाश जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों में उनकी प्रस्तुतियां दर्शकों को देखने को मिली हैं। इसके अलावा ओडिशा के कोणार्क महोत्सव, धवली कलिंगा महोत्सव, योगिनी फेस्टिवल, वर्षा फेस्टिवल तथा नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित ‘7वें गुरु देवप्रसाद दास नृत्य परंपरा’ सहित विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर भी उन्होंने ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति दी है।

उनकी कला-साधना का दायरा केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है। मैहर महोत्सव, पुष्कर गोदावरी फेस्टिवल, भारतीय डांस फेस्टिवल मामल्लापुरम, नुपुर फेस्टिवल गोवा, पुणे फेस्टिवल, मोढेरा महोत्सव के साथ एनआईटी जमशेदपुर, आईआईटी धनबाद और रांची नृत्य फेस्टिवल जैसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक मंचों पर भी उनकी प्रस्तुतियां हुई हैं। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग की ‘ए’ ग्रेड कलाकार के रूप में उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी व्यापक मंच प्रदान किया है। कला के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भुवनेश्वर की ‘त्रिधारा ओडिशी डांस अकादमी’ द्वारा उन्हें ‘19वें गुरु देवप्रसाद युवा प्रतिभा सम्मान-2025’ से सम्मानित किया गया है।

 

*कला-साधना से कला संरक्षण तक बढ़ाया कदम*

 

सुश्री आर्या नंदे का मानना है कि किसी कलाकार की जिम्मेदारी केवल स्वयं मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि कला की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी सोच के साथ वे ‘नृत्य श्रीधारा’ ओडिशी डांस अकादमी, सारंगढ़ एवं रायपुर का संचालन कर रही हैं। संस्था के माध्यम से बच्चों और युवा कलाकारों को ओडिशी नृत्य का प्रशिक्षण देने के साथ हर वर्ष ‘नृत्य श्रीधारा अवॉर्ड फेस्टिवल’ का आयोजन किया जाता है, जिसमें उभरती प्रतिभाओं को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। वर्तमान में वे कला केंद्र, रायपुर में भी बच्चों को ओडिशी नृत्य का प्रशिक्षण दे रही हैं तथा समय-समय पर कार्यशालाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों से परिचित करा रही हैं।

 

*‘सेवा संकल्प अभियान’ में सहभागिता को लेकर क्या कहती हैं आर्या नंदे?*

 

‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ने के संदेश पर सुश्री आर्या नंदे ने कहा कि समाज के विकास में हर व्यक्ति की अपनी भूमिका होती है। कोई व्यक्ति सेवा कार्यों से जुड़कर, कोई कला-संस्कृति के माध्यम से, कोई जन-जागरूकता के कार्यों में भाग लेकर और कोई अपने आसपास के लोगों को प्रेरित करके समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों की सार्थकता तभी बढ़ती है, जब आम नागरिक इन्हें केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर सामाजिक सहभागिता का अवसर समझें।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि युवा शक्ति के पास ऊर्जा, रचनात्मकता और नई सोच है। यदि इस ऊर्जा को समाज सेवा, संस्कृति, शिक्षा, पर्यावरण, जन-जागरूकता और सकारात्मक सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जाए, तो इसके व्यापक परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा, सहयोग और सहभागिता की परंपरा सदियों पुरानी है और आज की पीढ़ी आधुनिक सोच के साथ इन मूल्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सुश्री नंदे ने कहा कि कला मनुष्य को संवेदनशील बनाती है। नृत्य के माध्यम से भाव, अनुशासन, समर्पण और भारतीय संस्कृति की विविधता को अभिव्यक्त किया जा सकता है। इसी तरह सेवा के कार्य समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा करते हैं। जब कला, संस्कृति और सेवा एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित होता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक, सामाजिक एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों में अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप सहभागी बनें तथा अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इससे जोड़ें।

आर्या नंदे ने कहा कि भारतीय संस्कृति की शक्ति उसकी विविधता और उसकी जड़ों में निहित है। एक कलाकार के रूप में उन्होंने देश-विदेश में ओडिशी नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है और अब वे चाहती हैं कि समाज के अधिक से अधिक लोग सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़कर इस सामूहिक संकल्प को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव केवल बड़े प्रयासों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयासों और लोगों की सामूहिक सहभागिता से भी आता है।

उन्होंने आम नागरिकों से ‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर किसी एक सकारात्मक गतिविधि से जुड़े, दूसरों को प्रेरित करे और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए। उनके अनुसार, यही सहभागिता अभियान को व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दे सकती है और भारतीय संस्कृति के सेवा, समर्पण तथा सहयोग के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक हो सकती है।

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