नई दिल्ली। खाद्य पदार्थों के पैकेट पर सौ प्रतिशत शुद्ध या प्राकृतिक लिखा देखकर इसे गुणवत्ता की गारंटी नहीं मानना चाहिए। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ऐसे दावों को भ्रामक मानते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। नियामक की सख्ती के बाद छह कंपनियों ने अपने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग, लेबल, वेबसाइट और प्रचार सामग्री से ‘सौ प्रतिशत’ वाले दावे हटा दिए हैं।
प्राधिकरण का कहना है कि इस तरह के दावों से उपभोक्ताओं के मन में उत्पाद की पूरी शुद्धता, गुणवत्ता या श्रेष्ठता को लेकर भ्रम पैदा होता है। कई मामलों में उपभोक्ता ठगे भी जाते हैं।
FSSAI ने ‘100% शुद्ध’ दावों को भ्रामक माना
जाहिर है, इस कार्रवाई का संकेत है कि एफएसएसएआई ऐसे दावों की निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने जा रहा है। उपभोक्ता से आग्रह किया गया है कि फूड पैकेटों पर भ्रम में डालने वाला लेबल या विज्ञापन की शिकायत फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप और फोस्कोस पोर्टल पर कर सकते हैं।
शिकायत के साथ उन फूड पैकेटों की तस्वीर, लाइसेंस या पंजीकरण संख्या और ऑनलाइन बिक्री होने पर संबंधित लिंक भी साझा किया जा सकता है। दरअसल, खाद्य सुरक्षा कानून में ‘सौ प्रतिशत’ शब्द को खास गुणवत्ता की आधिकारिक पहचान के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है।
छह कंपनियों ने अपने उत्पादों से दावे हटाए
एफएसएसएआई ने मई 2025 में भी खाद्य कारोबारियों को लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में ऐसे दावों से बचने की सलाह दी थी। कहा था कि इस तरह के दावे सही और स्पष्ट होने चाहिए।
प्राधिकरण के अनुसार बोन बिस्कुट्स ने अपने बोन क्यूमिन फ्लेवर जीरा बाइट बिस्कुट के विज्ञापन से ऐसा दावा हटा दिया है।
ईमामी ने जंडू हनी और एपिस इंडिया ने अपने शहद उत्पादों से ‘सौ प्रतिशत’ वाले दावे हटा दिए हैं। इसी तरह एमवे इंडिया ने भी कोकोनट आयल से ऐसे दावे हटाने की पुष्टि की है। पुराने पैकेटों को बिक्री व्यवस्था से हटाकर नई पैकेजिंग लागू की जा रही है।

