नई दिल्ली। क्या यूपीआई पर कभी शुल्क लगना चाहिए? 6 अगस्त को लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित किया। 10 अगस्त को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी। अब यह बिल राष्ट्रपति की राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया। यह विधेयक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन करता है।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने साफ किया है कि ग्राहकों के लिए UPI मुफ्त रहेगा और सभी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन भी मुफ्त बने रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि UPI से पेमेंट करने पर ग्राहकों को कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा, और ज्यातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे।
मंत्रालय ने कहा कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू किए जाते हैं, तो वे एक निश्चित सीमा से ज़्यादा वाले कुछ खास मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर ही और बहुत कम दर पर लागू होंगे। मंत्रालय ने कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का मकसद UPI की लंबे समय तक चलने की क्षमता, तकनीकी तरक्की और नए खतरों से निपटने की मजबूती को पक्का करना है।
UPI की बढ़ती अहमियत
मंत्रालय ने कहा कि जैसे-जैसे ट्रांज़ैक्शन की संख्या बढ़ेगी, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश ज़रूरी होगा।
अब PF से पैसा निकालना होगा आसान, UPI के जरिए सीधे बैंक खाते में मिलेगा पैसा
इसने भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के एक अहम हिस्से के तौर पर UPI की बढ़ती अहमियत पर भी जोर दिया। इस प्लेटफ़ॉर्म ने अकेले पिछले महीने 29.9 लाख करोड़ रुपये के 2,366 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए और अब यह 11 विदेशी देशों में भी काम कर रहा है।
लागत का बोझ कितना बड़ा?
अब तक UPI और रुपे डेबिट कार्ड शुल्क से पूरी तरह मुक्त थे। इस बिल के बाद इस पर स्वतः संरक्षण खत्म हो गया है। अब कोई पेमेंट मैथड फ्री रहेगा या नहीं, यह सरकार पर निर्भर करेगा।
यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रीयल-टाइम पेमेंट नेटवर्क है। इसे चलाने की सालाना लागत करीब ₹20000 करोड़ बताई जाती है। जुलाई 2026 में अकेले 2366 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.9 लाख करोड़ रही। एआई, धोखाधड़ी रोकथाम और सुरक्षा के लिए और निवेश जरूरी है। आरबीआई गवर्नर और एनपीसीआई प्रमुख भी पूछ रहे है यह खर्च कौन उठाएगा?
छोटे व्यापारियों पर खतरा
यूपीआई के ज्यादातर लेनदेन छोटे हैं ₹30-40 के। ₹2000 से ऊपर के सिर्फ 4% लेनदेन वैल्यू का दो-तिहाई हिस्सा हैं। अगर छोटे लेनदेन पर भी शुल्क लगा तो रिक्शा चालक और ठेले वाले नकदी की ओर लौट सकते हैं। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था का मकसद ही कमजोर होगा। वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया है कि कम मूल्य के भुगतान मुफ्त रहेंगे और कोई एमडीआर फिलहाल तय नहीं है। लेकिन विधेयक में यह वादा लिखित नहीं है। फैसला अब कार्यकारी अधिसूचना पर टिका है।
बेहतर रास्ता मौजूद
आरबीआई के अधिशेष या क्रेडिट उत्पादों से आने वाले राजस्व से सिस्टम को फंड किया जा सकता है। सुरक्षा और एआई के लिए पैसे चाहिए, लेकिन ₹30 के लेनदेन पर शुल्क यूपीआई की सबसे बड़ी खूबी को खत्म कर देगा। अब चुनौती है वादों को वैधानिक सुरक्षा में बदलने की।

