BREAKING CG NEWS

गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा और गोहत्या पर केंद्रीय कानून की मांग, 6 चरणों में चलेगा देशव्यापी अभियान

Share this

बिलासपुर। गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गोहत्या पर रोक के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग को लेकर देशभर में छह चरणों का व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत प्रार्थना पत्र, हस्ताक्षर अभियान, जनसंपर्क, दिल्ली में चरणबद्ध कार्यक्रम और उपवास सहित विभिन्न माध्यमों से केंद्र सरकार तक मांग पहुंचाई जाएगी। अभियान से जुड़े भरत महाराज ने कहा कि गौहत्या बंद कराने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब देश की जनता एकजुट होकर अपनी मांग सरकार के सामने रखेगी, तभी इस दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आएगा।

 

भरत महाराज ने कहा कि गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग आजादी के समय से ही उठती रही है। 1947 में महात्मा गांधी और सरदार पटेल ने भी इसके लिए कानून की आवश्यकता पर जोर दिया था। 1966 में करपात्री जी महाराज के नेतृत्व में हुए आंदोलन और उसमें साधु-संतों के बलिदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब संत समाज ने उग्र आंदोलन के बजाय प्रार्थना और जनजागरण को अभियान का आधार बनाया है। इसके लिए पूरे देश को जागरूक कर समाज के हर वर्ग को जोड़ा जाएगा, ताकि सरकार पर संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से प्रभावी दबाव बनाया जा सके।

 

उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है, इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित सभी समुदायों को जोड़ा जा रहा है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी गौहत्या बंद करने का समर्थन किया है। इसके साथ ही, सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा गौवंश की समस्या के समाधान के लिए ‘केंद्रीय चरागाह नीति’ बनाने की मांग की गई है, ताकि उनके लिए पर्याप्त चारा और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध हो सके। सरकार से अपील की गई है कि गोधामों के संचालन में संतों और गौसेवा से जुड़े अनुभवी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

 

इस देशव्यापी अभियान को छह चरणों में पूरा करने की रूपरेखा तय की गई है। प्रथम चरण में 27 अप्रैल 2026 को देशभर से लगभग पांच करोड़ हस्ताक्षर और प्रार्थना पत्र केंद्र सरकार को सौंपे गए हैं। दूसरे चरण में 27 जुलाई 2026 को 15 करोड़ और 27 अक्टूबर 2026 को शुरू होने वाले तीसरे चरण तक कुल 40 से 45 करोड़ हस्ताक्षर जुटाकर सरकार तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यदि इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो चौथे चरण में 27 फरवरी 2027 से देशभर के लोग दिल्ली जाकर 6 महीने तक रोजाना लाखों पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजेंगे। 15 अगस्त 2027 तक समाधान न होने पर पांचवें चरण के तहत 16 अगस्त से 15 से 20 लाख संत व श्रद्धालु दिल्ली में 9 दिनों तक उपवास करेंगे। छठे और अंतिम चरण में देशभर के संत, सामाजिक और मातृशक्ति संगठन मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

 

इस अभियान के संबंध में अधिक जानकारी और कार्ययोजना से जुड़ने के लिए बिलासपुर जिले से मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। आम जनता विपुल शर्मा (9826187198), शुभम् दीक्षित (7208177332), अतुल सिंह (9826450411) और कृष्णा सिंह (9827164870) से संपर्क कर अभियान का हिस्सा बन सकती है।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *