बालोद–पाररास बायपास मार्ग पर लगे कई विद्युत पोल इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति से राहगीरों का ध्यान खींच रहे है। पोल को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह वर्षों की नौकरी के बाद अब “स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति” की तैयारी में हो। एक ओर तारों का सहारा और दूसरी ओर गुरुत्वाकर्षण का दबाव—बीच में बेचारे पोल, जो किसी उम्रदराज़ व्यक्ति की बत्तीसी झड़ जाने के बाद की मुस्कान जैसा नजर आ रहे है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पोल लंबे समय से इसी तरह झुका हुआ है, लेकिन संबंधित विभाग की नजर शायद अभी तक उस ओर नहीं गई। सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बारिश और तेज हवा के मौसम में यदि यह पोल धराशायी हो गए , तो राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और भारी वाहनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में जिम्मेदारी किसकी होगी—यह प्रश्न अभी से लोगों के मन में उठने लगा है।
“लगता है बिजली विभाग ने पोलो से कह रखा है—
‘जब तक सांस है, तब तक खड़े रहो… गिरना हो तो किसी फाइल की मंजूरी के बाद ही गिरना!'”
या फिर विभाग का नया नारा शायद कुछ ऐसा हो—
*”झुकेगा नहीं… जब तक खुद ही गिर न जाए!”*
*जनता की मांग*
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि बिजली विभाग तत्काल इस झुके हुए पोल का तकनीकी निरीक्षण कर उसे सीधा करे या आवश्यक होने पर नया पोल स्थापित करे, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
फिलिप चाको जिला ब्यूरो बालोद

