US-Iran Ceasefire : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। खबर है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर (युद्धविराम) को लेकर सहमति बन सकती है, जो आज से लागू हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे समझौते में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है, जिसने दोनों देशों के बीच बातचीत का माध्यम बनकर एक फ्रेमवर्क तैयार किया है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साझा किया गया है और जल्द ही इसे औपचारिक MoU (समझौता ज्ञापन) का रूप दिया जा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट खुलने की उम्मीद
सीजफायर लागू होते ही Strait of Hormuz को तुरंत खोलने की योजना है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जिसके बंद होने से वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई थी।
45 दिन के सीजफायर पर चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच 45 दिन के अस्थायी सीजफायर को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसे स्थायी शांति समझौते की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान बना ‘कम्युनिकेशन चैनल’
सूत्रों का दावा है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने पूरी रात अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों से संपर्क बनाए रखा। इस दौरान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची भी बातचीत में शामिल रहे।
ईरान की शर्तें क्या हैं?
ईरान ने साफ किया है कि वह स्थायी सीजफायर तभी करेगा जब:
- अमेरिका और इजरायल दोबारा हमला नहीं करेंगे
- आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिले
- फ्रीज किए गए एसेट्स रिलीज किए जाएं
इसके बदले ईरान न्यूक्लियर हथियारों की दिशा में आगे नहीं बढ़ने का वादा कर सकता है।
अभी तक नहीं आया आधिकारिक जवाब
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका और ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने भी इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया है। क्यों अहम है यह डील?
यह संभावित समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है और वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। अगर यह डील सफल होती है, तो न सिर्फ युद्ध टलेगा बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिल सकती है।

