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कोरासी व्यपर्तन से 3 गांवों के 250 किसानों की जिंदगी बदली

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  • पहले 5 क्विंटल उत्पादन, अब एकड़ में 20 क्विंटल उत्पादन 
किरीट ठक्कर/ गरियाबंद : जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत वनांचल ग्राम में कोरसी व्यपवर्तन बनने से 3 गांव के 250 किसानों की जिंदगी में खुशहाली आई है। अब सूखे खेतों में हरियाली दिखाई देती है। महज 2 साल पहले जहां 1 एकड़ में केवल 5 क्विंटल धान का उत्पादन होता था ,आज वही 15 से 20 क्विंटल तक धान का उत्पादन किसान ले रहे हैं। दरअसल इस क्षेत्र में सिंचाई के साधनों का नितांत अभाव था। किसान अपनी फसलों को पानी देने केवल और केवल मानसून पर निर्भर थे। बारिश अच्छी हुई तो ठीक, वरना लागत निकलना भी मुश्किल था। अंचल के किसानों के बहुप्रतीक्षित मांग पर शासन द्वारा कोरासी व्यपवर्तन निर्माण की स्वीकृति सन 2016-17 में दी गई। किसानों का सपना तब साकार हुआ, जब व्यपवर्तन पूरी तरह बनकर तैयार हुआ और पहली बार पानी की धार किसानों के खेतों में 2019 की खरीफ में पहुंची। वर्तमान खरीफ सत्र में भी कोरासी, मड़ेली और करकरा के किसानों के खेतों में पानी की धार पहुंची है। किसान उत्साहित है क्योंकि इस साल भी धान का उत्पादन बेहतर हुआ है। गांव के किसान पवन कुमार, कृत राम, कन्हैया लाल ने बताया कि इससे किसानों को दोहरा फायदा मिल रहा है एक तो उत्पादन बढ़ गया दूसरा समर्थन मूल्य और बोनस सहित 2500 रुपये प्रति क्विंटल का लाभ भी मिल रहा है । गांव के किसान बैशाखू राम और तेज राम ध्रुव बताते हैं कि खरीफ फसल में पानी की उपलब्धता से हमारे जीवन में समृद्धि आई हैं। पहले हम केवल 5 से 7 क्विंटल उत्पादन बमुश्किल से ले पाते थे लेकिन आज हम 15 से 20 क्विंटल उपज ले रहे हैं। ग्राम मड़ेली के किसान जानू राम सिन्हा उत्साहित होकर बताते हैं कि अब उनकी 2 एकड़ जमीन सच मायने में 4 एकड़ जमीन के बराबर हो गयी है अब वह भरपूर उत्पादन ले रहे हैं । ऐसे ही अन्य लाभान्वित किसानों का कहना है कि व्यपवर्तन बनने से उनकी जिंदगी खुशहाल हो गई है। किसान शासन और सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करते नहीं थक रहे हैं । जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पी.के.आनंद ने बताया कि कोरासी व्यपवर्तन योजना घुनघुटी नाला में बनाया गया है। इसकी स्वीकृति सन 2016-17 में हुई जिसे 2019 में पूर्ण कर लिया गया। इस योजना की सिंचाई क्षमता 325 हेक्टेयर है। योजना के पूर्ण होने के पश्चात कोरासी, मड़ेली व करकरा ग्राम के 152 आदिवासी किसान, 16 अनुसूचित जाति किसान और सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के 79 किसानों को सिंचाई का लाभ पिछले दो खरीफ फसल से मिल रहा है। अनुविभागीय अधिकारी जी.के. पंचभावे ने बताया कि वास्तव में यह व्यपवर्तन क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी एवं संजीवनी साबित हुई है। इससे किसान समृद्धि की ओर अग्रसर है।
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