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आज हम पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के आंदोलन संघर्ष के बारे में चर्चा करेंगे….. 

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Today we will discuss the agitation struggle of a separate Chhattisgarh state…..

बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने 1965 में भाटापारा में शासकीय स्कूल में शिक्षक की नौकरी से त्यागपत्र देकर छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन की कमान संभाली….

छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन संघर्ष में बाबूजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य नरेंद्र दुबे मीसा बंदी के साथ सात आठ वर्ष की उम्र से आंदोलन में साथ रहा..

मैं छत्तीसगढ़ राज्य के आंदोलन को बहुत करीब से देखा है बल्कि उसमें भागीदार भी रहा हूँ मैं अकेला नहीं हम चारो भाई-बहन बाबूजी और उनका पूरा संगठन छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन को धारदार बनाते हुए सड़क से संसद भवन तक संघर्ष किये….

1965 में शासकीय नौकरी से इस्तीफा देने के बाद बाबूजी छत्तीसगढ़ी समाज संगठन का गठन कर राज्य निर्माण के लिए निकल पड़े और फिर पलट कर उन्होंने कभी देखा नहीं….

छत्तीसगढ़ी समाज संगठन के प्रथम अध्यक्ष रामानंद शुक्ला जी थे और महासचिव आचार्य नरेंद्र दुबे बनाए जाते हैं जिनके द्वारा राज निर्माण के लिए क्रमबद्ध आंदोलन की शुरुआत सम्मेलन के माध्यम से की जाती है…

16 मई 1965 को पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर आमापारा आर डी तिवारी स्कूल रायपुर में छत्तीसगढ़ के बुद्धिजीवियों जनप्रतिनिधियों का सम्मेलन आहूत किया जाता है जिसमें पंच सरपंच नगर निगम से जुड़े जनप्रतिनिधि बुद्धिजीवी वकील शिक्षक और छत्तीसगढ़िया समाज के प्रबुद्ध जन शामिल होते हैं सम्मेलन की अध्यक्षता एस पी दुबे नगर पालिका रायपुर के पूर्व उपाध्यक्ष और बेमेतरा क्षेत्र के तात्कालिक विधायक लक्ष्मण वैद्य करते हैं इस सम्मेलन में 8 से 10,000 लोग शामिल होते हैं सम्मेलन में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का प्रस्ताव पारित होता है जिसमें 500 से अधिक पंच सरपंच डॉक्टर वकील प्रबुद्ध जन उपस्थित होते हैं..

दूसरा अधिवेशन 19 अप्रैल 1966 को तात्यापारा प्राइमरी स्कूल के मैदान में किया जाता है जिसमें अध्यक्षता सरजू प्रसाद दुबे और समाजवादी नेता कमल नारायण शर्मा करते है…

16 जनवरी 1967 को ईदगाह भाटा मैदान में तीसरा सम्मेलन आयोजित किया जाता है जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं इस सम्मेलन को छत्तीसगढ़ी समाज संगठन के अध्यक्ष रामानंद शुक्ला और महासचिव आचार्य नरेंद्र दुबे संबोधित करते हैं और इसमें पूर्व के सम्मेलन में किए गए प्रस्ताव को पारित कर भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन भेजा जाता है जिसमें लगभग 2227 पंचायत प्रतिनिधि एवं प्रमुख आम जनता का हस्ताक्षर रहता है जिसे रजिस्टर्ड डाक के द्वारा देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को भेजा जाता है……

रामानंद शुक्ला जी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है उसके बाद अध्यक्ष का आचार्य नरेंद्र दुबे संभालते हैं और पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के आंदोलन से आम जनता को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ के गांव गांव में 1968 से एक आंदोलन शुरू किया जाता है जिसमें छत्तीसगढ़ी बोलबो, छत्तीसगढ़ी लिखबो, छत्तीसगढ़ी पढ़बो के नारे के साथ आंदोलन शुरू किया जाता है इसका काफी प्रभाव पड़ा क्योंकि उस समय गांव शहर में छत्तीसगढ़ी भाषा ही आम बोलचाल की भाषा थी गांव का किसान मजदूर महिला पुरुष बच्चे गांव का गौटिया जमींदार नगर निगम कलेक्ट्रेट स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालय शासकीय अशासकीय कार्यालय सभी जगह छत्तीसगढ़ी बोली भाषा ही प्रमुखता से बोली जाती थी इसलिए छत्तीसगढ़ी समाज संगठन के साथ छत्तीसगढ़ी जनता जुड़ने लगी गांव गांव में वॉल राइटिंग नुक्कड़ सभा छोटे-बड़े जुलूस छत्तीसगढ़ी समाज संगठन के नेतृत्व में होने लगे….

छत्तीसगढ़ी मातृभाषा में 40 वर्षों तक छत्तीसगढ़ी सेवक नमक साप्ताहिक पत्रिका बाबूजी के नेतृत्व में निकाली गई जिसका संपादक स्वयं थे और उनके सहयोगी के रूप में जागेश्वर प्रसाद थे….

उसी समय देश में जयप्रकाश नारायण का आंदोलन खड़ा होता है इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री देश में आपातकाल की घोषणा करती है और छत्तीसगढ़ में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन का नेतृत्व करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य नरेंद्र दुबे अध्यक्ष और उनके 300 साथियों की गिरफ्तारी पूरे छत्तीसगढ़ में की जाती है आपातकाल के दौरान लगभग आंदोलन रुक जाता है…..

आपातकाल की समाप्ति और जेल से रिहाई के बाद पुनः छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के लिए बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे का दौरा प्रारंभ हो जाता है दुगनी ऊर्जा के साथ अपने साथियों कार्यकर्ताओं पदाधिकारी जो लगभग 300 जेल में बंद थे उनके साथ गांव गांव का दौरा किया जाता है…

23 अक्टूबर 1978 को रायपुर में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की पहली सबसे बड़ी रैली निकाली जाती है जिसमें लगभग 10000 से अधिक छत्तीसगढ़ की जनता शामिल होती है इस रैली में नरेंद्र दुबे जी के साथ दीनदयाल वर्मा जागेश्वर प्रसाद जी पी चंद्राकर अब्दुल गनी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रतीलाल सोनी धनीराम वर्मा जगन्नाथ बघेल चिनुकू दास महंत रामगुलाम ठाकुर डॉक्टर शंकर दुबे दाऊ बृजभूषण भगत साहू युधिष्ठिर चंद्राकर कुंज बिहारी श्रीनिवासन हरिशंकर दुबे जी एस श्रीवास्तव डॉ दशरथ निषाद टेकचंद पटेल डी आर यादव सहित सैकड़ो विभिन्न सामाजिक प्रबुद्ध जन शामिल होते हैं…. रैली के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनाने हेतु ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से भेजा किया जाता है…..

3 नवंबर 1978 को राष्ट्रपति कार्यालय से छत्तीसगढ़ी समाज कार्यालय हांडीपारा में पत्र आता है कि आपका ज्ञापन प्रधानमंत्री को भेजा गया..

16 नवंबर 1978 को प्रधानमंत्री कार्यालय से पी ए एमपी गुप्ता के द्वारा जानकारी दी जाती है कि आप प्रतिनिधि मंडल के साथ जिसमें अध्यक्ष सहित 15 सदस्य हो सकते हैं 2 दिसंबर 1978 को प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली में वार्ता के लिए आमंत्रित है…..

2 दिसंबर 1978 छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलनकारी के लिए पहली जीत थी जो की राज आंदोलन के संबंध में सीधे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अध्यक्ष नरेंद्र दुबे और प्रतिनिधि मंडल से चर्चा की और सहमत भी हो गये उनका कथन था की यदि तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के लिए विधानसभा से शासकीय संकल्प पारित करके केंद्र सरकार को भेज दें…. तो छत्तीसगढ़ राज्य बना देंगे….. आंदोलनकारीयों में उत्साह और जोश दुगना हो गया….

दिल्ली से वापसी होते ही छत्तीसगढ़ी समाज के कार्यकर्ता गांव ब्लॉक में दौरा करने लगे बाबूजी के नेतृत्व में 23 जनवरी 1989 से लेकर 30 जून 1989 तक 6 माह में ब्लॉक स्तरीय 21 रेलिया और 6 शहरों में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बड़ी-बड़ी रैली निकाली गई…. लगातार पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की रैलियां को देखकर उस समय के सभी प्रमुख राजनीतिक दल के नेताओं के होश उड़ गए अधिकांश स्थापित नेता पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का खुलकर विरोध करते थे समाचार पत्रों में उनके बयान भी आते रहते थे…..

इसके बाद 1980 से लेकर 1994 के बीच बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे के नेतृत्व में लगातार रैली धरना प्रदर्शन क्रमबद्ध चलता रहा…. 1980 में दिल्ली में बड़ी रैली हुई….

1983,84 के आसपास सरायपाली बसना पिथौरा क्षेत्र में जहरीली शराब के कारण ग्रामीणों की मौत हो जाती है वहां भी छत्तीसगढ़ी समाज के द्वारा दोषी लोगों की गिरफ्तारी को लेकर आंदोलन किया जाता है उस समय कलेक्टर नजीब जंग हुआ करते थे….

सर्वप्रथम 1980 में शासकीय निजी साइन बोर्ड को कोल तार से पोतकर छत्तीसगढ़ी में लिखने का एक आंदोलन दबाव प्रारंभ किया जाता है समाचार पत्रों में पक्ष में भी लिखा जाता है आलोचना भी होती है लेकिन यह आंदोलन जारी रहता है…

1983,84 में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में ब्राह्मण पारा के प्रत्याशी के रूप में अनिल दुबे एनएसयूआई के प्रत्याशी को हराकर जीतते हैं…..

बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे के मार्गदर्शन पर चलते हुए छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन को आगे बढ़ाने में अध्यक्ष अनिल दुबे लग जाते हैं छात्रों और युवाओं का बड़ा साथ विश्वास उनको प्राप्त होता है और वे छत्तीसगढ़ी युवाओं शिक्षित बेरोजगारों को छत्तीसगढ़ के कल कारखानों में और शासकीय नौकरियों में शत प्रतिशत रोजगार देने की मांग को लेकर बड़ा प्रभावशाली जन आंदोलन खड़ा करते हैं जो कि लगभग एक दशक तक जोर से जारी रहा …

1984 को रायपुर गांधी चौक में महात्मा गांधी की प्रतिमा में माल्यार्पण कर छात्रों का युवाओं की एक बड़ी पदयात्रा भिलाई इस्पात कारखाना तक निकाली जाती है जिसमें स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों को छत्तीसगढ़िया युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर भिलाई इस्पात कारखाना के बाहर हजारों छात्रों का प्रदर्शन होता है जिसमें पूरा मैनेजमेंट पुलिस प्रशासन के साथ सड़क पर छात्र संघ अध्यक्ष अनिल दुबे का इंतजार करते खड़ा रहता है और वहां छात्र नेताओं के प्रतिनिधि मंडल के साथ चर्चा होती है..

छत्तीसगढ़ बेरोजगार संघ मजदूर संघ छात्र संघ का नेतृत्व बाबूजी के मार्गदर्शन में अनिल दुबे संभालनें लगते हैं…

बाल्को कोरबा एनटीपीसी रायपुर के भनपुरी उरला क्षेत्र में लगे उद्योगों में छत्तीसगढ़ी बेरोजगार संघ का बड़ा आंदोलन शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार देने के नाम पर एक दशक तक चलता है साथ ही बीच बीच में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग पर रैली भी निकली जाती है…

वुल वर्थ उद्योग, आडवाणी अर्लीकन,

गणेश जूट मिल के साथ-साथ W R S कॉलोनी के डीजल लोको सेट में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाता है जिसमें हजारों बेरोजगार पहुंचकर वहां पर रेलवे की इंजन को पलट देते हैं लाठी चार्ज होता है गिरफ्तारियां होती है….

रायपुर रेलवे स्टेशन में छत्तीसगढ़ी में ट्रेनों के आने जाने की घोषणा करने के नाम पर सैकड़ो कार्यकर्ता अनिल दुबे श्यामधर वर्मा रमेश चंद्राकर संतोष वर्मा और पप्पू शर्मा के नेतृत्व में पहुंचकर स्टेशन में कब्जा करके छत्तीसगढ़ी में उदघोषणा प्रारंभ कर देते हैं वहां पर लाठी चार्ज होता है कार्यकर्ताओं को चोटे आती है गिरफ्तारी होती है…

कार्यकर्ताओं में डर की जगह जोश और बढ़ जाता है वह हिंदी में लिखे गए साइन बोर्ड को छत्तीसगढ़ी में लिखने के लिए कोल तार लगाकर पोत देते है…. यहां भी गिरफ्तारियां होती है जेल भेजा जाता है….

रायपुर कलेक्ट्रेट में बेरोजगारों का आंदोलन होता है सैकड़ो समर्थक कार्यकर्ता धरना देकर बैठ जाते हैं वहां भी चारों तरफ से घेर कर बेदर्दी पूर्वक लाठी चार्ज किया जाता है गिरफ्तारी होती है…..

वुलवर्थ फैक्ट्री में मजदूरों को बोनस और वेतन बढ़ाने के नाम पर आंदोलन होता है सुबह 5:00 बजे अनिल दुबे के नेतृत्व में सैकड़ो कर्मचारी फैक्ट्री का कामकाज रोक कर धरने पर बैठ जाते हैं वहां पर पुलिस प्रशासन चारों ओर से घेरकर लाठी चार्ज करती है गिरफ्तारी होती है और इस गिरफ्तारी के विरोध में रायपुर शहर के कई चौक में एक साथ चक्का जाम होता है पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल जाते हैं रायपुर बंद की घोषणा होती है अनिल दुबे को छोड़ा जाता है……

10 मई 1989 को छत्तीसगढ़ राज्य एवं 170 ख के मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में पर्चा फेंका गया था जिसमें सरायपाली बसना क्षेत्र के मोतीलाल नायक लोकनाथ चौधरी एवं श्री राम नायक को मध्य प्रदेश विधानसभा के उठते तक सजा सुनाई जाती है….

1990 के आसपास मोदी सीमेंट कारखाना रवान बलोदा बाजार में स्थानीय बेरोजगारों को जिन किसानों की खेती की जमीन कारखाने के लिए अधिकृत की गई है उनके परिवार को नौकरी देने के नाम पर किए गए आंदोलन के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा गोली चलाइ जाती है धारा 144 लगा दिया जाता है वहां भी मैं पहुंचा था इसका नेतृत्व अनिल दुबे जागेश्वर प्रसाद जी कर रहे थे…..

1987 में सरायपाली बसना पिथौरा क्षेत्र में 170 ख के विषय पर आचार्य नरेंद्र दुबे जी के नेतृत्व में 2000 से अधिक किसान ट्रैक्टरों के साथ नेशनल हाईवे जाम कर देते हैं……

26 फरवरी 1988 को मांग पत्र के साथ चर्चा हेतु मध्य प्रदेश के राज्यपाल के विशेष सचिव 9 प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के लिए आमंत्रित करते हैं…

15 मार्च 1988 को भोपाल में राज भवन में राज्यपाल जी के साथ प्रतिनिधि मंडल की चर्चा होती है जिसमें अध्यक्ष प्रेम शंकर दीवान जागेश्वर प्रसाद अनिल दुबे सूबेदार रामजीलाल जीपी चंद्राकर टेकचंद पटेल कुंज बिहार श्रीनिवासन आदि शामिल होते हैं……..

23 जनवरी 1994 को मध्य प्रदेश विधानसभा के सामने 5000 से अधिक छत्तीसगढ़िया छात्र किसान मजदूर प्रदर्शन करते हैं उनकी गिरफ्तारी होती है मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौपा जाता है कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए संकल्प पारित करें 15 दिन बाद 7 मार्च को मध्य प्रदेश विधानसभा से अशासकीय संकल्प पारित कर भारत सरकार को भेजा जाता है….

19 फरवरी 1996 को रायपुर में ऐतिहासिक एवं विशाल रैली का आयोजन किया जाता है जिसमें 15000 से अधिक छत्तीसगढ़िया जनता के साथ छात्र युवा भारी संख्या में शामिल होते हैं विश्वविद्यालय छात्र संघर्ष समिति के छात्र नेताओं के साथ सैकड़ो छात्र छात्राएं भी रैली में शामिल होकर पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के नारे को बुलंद करते हैं….

छत्तीसगढ़ राज्य के लिए केवल बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे ही नहीं बल्कि अनेक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का आंदोलन अपने स्तर पर करते रहे…..

आजादी के पहले पंडित सुंदरलाल शर्मा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना कर पृथक राज्य की माँग का बीज बो दिया था आजादी के बाद डॉक्टर खूबचंद बघेल छत्तीसगढ़ के स्वप्नदृष्टा ने पृथक छत्तीसगढ़ राज्य को लेकर एक आंदोलन खड़ा किया…

संत पवन दीवान नें पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की हवा को आंदोलन के माध्यम से तेज किया इसमें ब्राह्मण पारा के अनेक युवा नेता शामिल हुए जिसमें बसंत दीवान डॉ शंकर दुबे शेषनारायण शुक्ला अनिल तिवारी ध्रुव तिवारी आदि शामिल थे एक तरह से पूरा ब्राह्मण पारा पवन दीवान के पीछे खड़ा था संत पवन दीवान चुनाव भी लड़े लेकिन वह बाद में कांग्रेस में शामिल हो गये….

कांग्रेस के बड़े नेता चंदूलाल चंद्राकर जी ने 1990 के आसपास पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग के समर्थन में अपनी बातें रखी ….

1990 के बाद 95 आते-आते छत्तीसगढ़ राज्य के लिए सर्वदलीय मंच के गठन का प्रयास हुआ इस समय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुलपति हर्षवर्धन तिवारी राजेंद्र प्रसाद शुक्ला आदि ने बुद्धिजीवों को एकत्रित कर राज का समर्थन किया…

दाऊ आनंद अग्रवाल जी ने पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 1995 के बाद आंदोलन प्रारंभ किया वह लगातार क्रमिक धरने पर बैठे उनके साथ डॉक्टर उदयभान सिंह चौहान भी रहे….

बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के लिए 1989,1988 एवं 24 जुलाई 2000 को दिल्ली में विशाल प्रदर्शन रैली मार्च का आयोजन किया….

बहुत सी बातें हैं बताने को लिखने को लेकिन यहां सब मैंने इसलिए आज आपसे साझा किया कि कुछ लोग कहते हैं कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए किसी ने कोई मांग नहीं की आंदोलन नहीं किया ऐसे ही हमे उपहार के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य मिल गया छत्तीसगढ़ राज्य के लिए दशकों से आंदोलन हुआ सैकड़ो हजारों लोगों ने अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए लगा दिया तब कहीं जाकर श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया क्योंकि वह जानते थे की छत्तीसगढ़ की जनता छत्तीसगढ़ राज्य की मांग कर रही है आंदोलन हो रहे हैं भले ही हिंसात्मक आंदोलन ना हुआ हो लेकिन प्रजातांत्रिक ढंग से लगातार आंदोलन होते रहे तभी तो उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की घोषणा की वे संवेदनशील जागरूक बुद्धिमान नेता थे जनता की नब्ज पहचानते थे….

भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जी ने जैसे ही तीन राज्य बनाने की घोषणा की तो 1998 के बाद छत्तीसगढ़ की सड़कों में ऐसे नेता सड़क पर उतरकर आंदोलन करने लगे जिन्होंने पूर्व में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए कभी आंदोलन नहीं किया था उनके द्वारा आज अभी तुरंत छत्तीसगढ़ राज्य बना दिया जाए की मांग की जाने लगी उन्हें भी हम धन्यवाद देते हैं कि आखिरकार उन्होंने भी छत्तीसगढ़ राज्य की मांग का समर्थन किया………

हम सभी आंदोलनकारियो को साधुवाद देते हैं धन्यवाद देते हैं चाहे देर से ही सही उन्हें भी छत्तीसगढ़ राज्य का समर्थन सड़क पर आकर करना पड़ा आज छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर समस्त जनता को बधाई…..

आज हमारा छत्तीसगढ़ उन्नति की दिशा में आगे बढ़ रहा हैं अब हमें इसे संभालना है खुशहाल बनाना है आगे लेकर जाना है आंदोलनकारीयों के सपनों का छत्तीसगढ़ बनाना है…

चार चित्र आपके सामने पोस्ट किया हूँ मेरे पास सबसे अधिक आंदोलन के संबंध में व्हाइट एंड ब्लैक फोटो है रंगीन नहीं क्योंकि उस समय समाचार पत्र में रंगीन फोटो नहीं होती थी यह नवभारत क्रॉनिकल देशबंधु अमृत संदेश आदि उस समय जो लीडिंग पेपर थे 80 से 90 के दशक के बीच के समाचार में प्रकाशित फोटो है आप अंदाजा लगा सकते हैं….

रेल रोकने है…

रेलवे स्टेशन में छत्तीसगढ़ी में घोषणा के लिए…

मालवीय रोड सिटी कोतवाली सदर बाजार की सड़कों में हजारों की संख्या में रैली का नेतृत्व बाबूजी आचार्य नरेंद्र दुबे कर रहे हैं…..

कौन कहता है की छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आंदोलन नहीं हुआ तस्वीरें बोलती है इतिहास में सब दर्ज है….

आप सभी को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं…. 🙏

 

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