बिलासपुर:- जांजगीर-नैला में मां की भव्य प्रतिमा और विशाल 3D पंडाल की चर्चा देश-प्रदेश में हो रही है। माता रानी के दर्शन और पंडाल की भव्यता देखने दूर-दराज से श्रद्धालु बस और ट्रेन के जरिए पहुंच रहे हैं। इसका सीधा असर बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दिखाई दे रहा है, जहां यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि प्लेटफॉर्म से लेकर लोकल ट्रेनों तक पैर रखने की जगह नहीं बच रही है।
श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने तीन फेरों में चल रही लोकल ट्रेनें भी नाकाफी साबित हो रही हैं। ट्रेन आते ही प्लेटफॉर्म पर चढ़ने-उतरने के लिए अफरा-तफरी मच जाती है। सबसे खतरनाक स्थिति ट्रेन के भीतर और दरवाजों पर देखने को मिल रही है, जहां जगह नहीं मिलने के कारण यात्री गेट पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में जरा-सी चूक या अचानक झटका किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है और यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकता है।भीड़भाड़ का फायदा उठाकर महिला चोर गिरोह के सक्रिय होने की आशंका भी यात्रियों की चिंता बढ़ा रही है। इसके बावजूद प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ और जीआरपी की प्रभावी मौजूदगी नजर नहीं आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों की इतनी भारी भीड़ के बीच न तो भीड़ नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम दिखाई दे रहे हैं और न ही ट्रेन में सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था।
आखिर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रेलवे को त्योहारी सीजन और माता रानी के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ का अंदाजा है, तो अतिरिक्त ट्रेनों और सुरक्षा बलों की तैनाती के इंतजाम क्यों नहीं किए गए।क्या रेलवे प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।गेट पर लटककर सफर करते यात्री किसी अनहोनी का इंतजार नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था की गंभीर चेतावनी हैं। समय रहते भीड़ नियंत्रण, अतिरिक्त ट्रेनों और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।

