Timely detection and regular therapy is very important in cerebral palsy: Dr. Neha Agarwal
रायपुर। विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस के अवसर पर बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर उपचार एवं पुनर्वास के महत्व को लेकर न्यूरो एवं पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट एवं Sensory Integration Therapist डॉ. नेहा अग्रवाल ने अभिभावकों से बच्चों के विकास संबंधी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की।
डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि Cerebral Palsy (CP) बच्चों में होने वाली एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो मुख्य रूप से movement, posture, muscle tone, balance और coordination को प्रभावित कर सकती है। प्रत्येक बच्चे में इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है, इसलिए therapy भी बच्चे की individual needs और functional goals के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि early identification और early intervention बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बच्चे में बैठने, खड़े होने, चलने, हाथों के उपयोग, संतुलन या movement pattern में असामान्यता दिखाई देती है, तो अभिभावकों को विशेषज्ञ से assessment कराना चाहिए।
डॉ. नेहा के अनुसार, “Cerebral Palsy वाले बच्चे को केवल उसकी disability से नहीं, बल्कि उसकी abilities और potential से देखना चाहिए। हमारा लक्ष्य सिर्फ बच्चे को चलाना नहीं, बल्कि उसे दैनिक जीवन की गतिविधियों में अधिक स्वतंत्र, सुरक्षित और सहभागी बनाना होना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार Neuro Physiotherapy, Pediatric Physiotherapy, Sensory Integration Therapy, Speech Therapy, Occupational Therapy एवं अन्य rehabilitation services को multidisciplinary approach के साथ शामिल किया जा सकता है। नियमित therapy, home program और परिवार की सक्रिय भागीदारी से बच्चे की functional independence को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
डॉ. नेहा अग्रवाल ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चे के developmental milestones में देरी या असामान्य movement को “समय के साथ ठीक हो जाएगा” कहकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है। समय पर assessment और सही intervention बच्चे के विकास की दिशा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज को cerebral palsy से प्रभावित बच्चों के प्रति सम्मान, acceptance और inclusion का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। हर बच्चे को सीखने, खेलने, आगे बढ़ने और अपनी क्षमता के अनुसार जीवन जीने का समान अवसर मिलना चाहिए।
डॉ. नेहा अग्रवाल (PT)
Neuro & Pediatric Physiotherapist | Sensory Integration Therapist
Director, Lotus Clinic, Raipur
Physiotherapist, Blue Bird Children’s Hospital, Raipur
15+ Years of Clinical Experience

