CGPSC Mains Result: High Court rejects demand for re-evaluation
CGPSC को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच यानी पुनर्मूल्यांकन की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि CGPSC के नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है।
क्यों खारिज हुई याचिका?
याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए। उनका कहना था कि 265 पदों के लिए 1:3 के अनुपात में कैंडीडटेस को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए। इस हिसाब से करीब 795 कैंडीडटेस इंटरव्यू के लिए चयनित होने चाहिए थे। लेकिन CGPSCने 608 कैंडीडटेस को ही इंटरव्यू के लिए चुना।
CGPSC ने कोर्ट को बताया कि मुख्य परीक्षा में कैंडीडटेस के लिए न्यूनतम अंक तय किए गए थे। इन अंकों को हासिल करना जरूरी था। आयोग के मुताबिक सभी कैंडीडटेस न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके। इसलिए 265 पदों के मुकाबले 1:3 अनुपात पूरा नहीं हो पाया और 608 कैंडीडटेस ही इंटरव्यू के लिए योग्य पाए गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की स्पष्ट अवैधता या बड़ी गड़बड़ी साबित नहीं कर पाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेषज्ञों द्वारा की गई परीक्षा की जांच में अदालत तभी दखल दे सकती है, जब मूल्यांकन में साफ तौर पर नियमों का उल्लंघन दिखाई दे। कोर्ट के फैसले के बाद CGPSC Mains 2025 की आगे की प्रक्रिया जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।

