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बालोद युवा कांग्रेस चुनाव में दो पैनल, किसके साथ कौन?

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Two panels in the Balod Youth Congress election—who is with whom?

बालोद। प्रदेश में चल रहे युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव ने बालोद की कांग्रेस राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। युवा कांग्रेस के विभिन्न पदों के लिए सामने आ रहे अलग-अलग नामों ने संगठन के भीतर चल रही खेमेबाजी की चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।

 

स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार एक पैनल में जिलाध्यक्ष पद के लिए साजन पटेल, विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए सुमित शर्मा, शहर अध्यक्ष पद के लिए फैज अली तथा ब्लॉक अध्यक्ष पद के लिए राहुल निषाद सहित अन्य प्रत्याशियों के नाम सामने आ रहे हैं। इस पैनल को चर्चाओं में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थक खेमे से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं दूसरे पैनल में जिलाध्यक्ष पद के लिए आसिफ गहलोत, विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए विषयंत सिन्हा, शहर अध्यक्ष पद के लिए इंदु यादव तथा ब्लॉक अध्यक्ष पद के लिए चेवा ठाकुर सहित अन्य प्रत्याशी मैदान में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं में इस पैनल को वर्तमान शहर कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव के समर्थन वाले खेमे से जोड़ा जा रहा है।

एक संगठन, दो पैनल… और सवाल कई!

कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव का उद्देश्य निश्चित रूप से संगठन को मजबूत करना है, लेकिन बालोद में चुनावी मैदान की तस्वीर कुछ अलग ही कहानी बयां करती नजर आ रही है। जिलाध्यक्ष से लेकर ब्लॉक अध्यक्ष तक अलग-अलग पैनल सामने आने से कार्यकर्ताओं के बीच भी यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि आखिर युवा कांग्रेस का चुनाव है या फिर कांग्रेस के भीतर प्रभाव की परीक्षा?

 

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि कौन सा खेमा अपने समर्थकों को ज्यादा पदों तक पहुंचा पाता है। चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

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बालोद कांग्रेस में आपसी खींचतान और अलग-अलग राजनीतिक खेमों को लेकर चर्चाएं कोई नई बात नहीं हैं। अब युवा कांग्रेस चुनाव ने इस सियासी चर्चा को नया मंच दे दिया है।

व्यंग्य में कहें तो संगठन एक, झंडा एक और पार्टी भी एक… लेकिन पैनल अलग-अलग! अब कार्यकर्ताओं के सामने सवाल यह है कि चुनाव के बाद ये पैनल साथ बैठेंगे या फिर चुनावी मुकाबले की गर्मी संगठन के भीतर भी बनी रहेगी?

 

फिलहाल युवा कांग्रेस चुनाव ने बालोद की सियासत का तापमान जरूर बढ़ा दिया है। परिणाम आने के बाद तस्वीर साफ होगी कि किस पैनल की रणनीति सफल होती है और किसे संगठन की राजनीति में अगली पारी का इंतजार करना पड़ता है।

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