बिलासपुर: बिलासपुर की सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कई ई-रिक्शा चालकों के पास न तो वैध लाइसेंस होने की जानकारी है और न ही यातायात नियमों की पर्याप्त समझ। इसके बावजूद सिग्नल तोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना और तेज रफ्तार जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने वालों पर चालानी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। यातायात पुलिस की ओर से सख्ती के बजाय समझाइश दिए जाने से ऐसे चालकों के हौसले बढ़ने की बात कही जा रही है।स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शहर में कम उम्र के युवकों के ई-रिक्शा चलाने की शिकायतें लगातार सामने आती हैं। कुछ चालकों के नशे की हालत में वाहन चलाने और आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों से जुड़े होने के आरोप भी सामने आते रहे हैं। मामूली बात पर विवाद और आक्रामक व्यवहार की घटनाएं भी चिंता बढ़ाती हैं। ऐसे में केवल क्यूआर कोड लगाकर पहचान दर्ज करने से सड़क सुरक्षा की समस्या खत्म नहीं होगी। पुलिस को लाइसेंस, उम्र, नशे की जांच, वाहन दस्तावेज और यातायात नियमों के उल्लंघन पर नियमित कार्रवाई करनी होगी।सवाल यह भी है कि जब सिग्नल तोड़ने और यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों पर तत्काल चालान नहीं होगा, तो ई-रिक्शा चालकों में कानून का डर कैसे पैदा होगा? पुलिस को समझाइश के साथ-साथ नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई का संदेश भी देना होगा। यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में ढिलाई भविष्य में किसी बड़े हादसे या विवाद का कारण बन सकती है।ई-रिक्शा में क्यूआर कोड लगाने की व्यवस्था यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन उससे पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सड़क पर वाहन चलाने वाला व्यक्ति नियमों के मुताबिक पात्र भी है या नहीं। नाबालिग, बिना लाइसेंस, नशे में या नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वरना क्यूआर कोड सिर्फ पहचान बताएगा, सड़क पर बढ़ती मनमानी नहीं रोकेगा।
सड़कों पर बेलगाम ई-रिक्शा, नियम तोड़ने वालों पर सख्ती कब?

