SC tough on black money and electoral irregularities; High Court approval mandatory for withdrawal of cases.
नई दिल्ली। यह आम बात रही है कि चुनाव प्रक्रिया में गलत तरीकों (जैसे काले धन का इस्तेमाल) का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवारों पर दर्ज मामले सरकार बदलने पर राज्य सरकार द्वारा वापस ले लिए जाते हैं लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी।
सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का जिक्र करते हुए कि मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े केस सिर्फ हाई कोर्ट की मंजूरी से ही वापस लिए जा सकते हैं, जस्टिस संजय करोल और एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि यह नियम चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर भी लागू होना चाहिए।
अदालत ने क्या कहा?
पीठ ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि यह सुझाव निष्पक्षता की दिशा में एक बड़ा कदम है। असल में इससे चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी आपराधिक मुकदमों के मामले में चुने हुए सांसदों और विधायकों के बराबर आ जाएंगे। हमारी राय में इससे उम्मीदवारों और संभावित उम्मीदवारों को यह संदेश मिलता है कि गलत कामों में शामिल होना कोई मामूली बात नहीं है। एक बार जब उनके खिलाफ मुकदमा शुरू हो जाता है तो सिर्फ राजनीतिक सत्ता बदलने से ही वे बच नहीं पाएंगे।”
पीठ ने आगे कहा, “दूसरे शब्दों में एक संवैधानिक लोकतंत्र अपने प्रतिनिधियों से उसी स्तर की नैतिक ईमानदारी और सच्चाई की उम्मीद करता है।”
‘न्याय प्रणाली की भावना के खिलाफ’
अदालत ने यह भी कहा, “चुनाव आयोग का मानना है कि आम तौर पर केस वापस नहीं लिए जाने चाहिए। हालांकि, यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि राजनीतिक सत्ता में बदलाव के कारण अक्सर ऐसे फैसले लिए जाते हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसा करना निष्पक्ष आपराधिक न्याय प्रणाली की भावना के पूरी तरह खिलाफ है। यह प्रणाली संवैधानिक रूप से चलने वाले गणतंत्र की पहचान है, खासकर भारत जैसे देश की, जहां शक्तियों का बंटवारा स्पष्ट रूप से माना जाता है और जहां तक संभव हो उसे लागू भी किया जाता है।”
कोर्ट ने जारी किए निर्देश
अदालत ने कई निर्देश जारी किए, जिनमें एक निर्देश यह भी था कि अगर चेकिंग के दौरान स्टैटिक सर्विलांस टीम को 10 लाख रुपये से ज्यादा नकद मिलता है तो इनकम टैक्स विभाग को कार्रवाई के लिए सक्रिय किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच करने वाले अधिकारी को केस दर्ज होने की तारीख से एक साल के भीतर जांच पूरी करने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए।
चुनावी राजनीति में काले धन की भूमिका पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “लोकतंत्र, कानून का शासन और चुनावी प्रक्रिया ये तीनों विचार एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं। अगर इनमें से किसी एक पहलू से भी समझौता किया जाता है तो इसका असर इन तीनों विचारों और उनके क्रियान्वयन पर पड़ता है।”

